सावन सोमवारी: इस्पात नगरी में आस्था का संगम, नंगे पांव दोमुहानी घाट से मंदिरों तक उमड़ा जनसैलाब

Manju
By Manju
2 Min Read

डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: सावन की पहली सोमवारी पर इस्पात नगरी जमशेदपुर का नजारा पूरी तरह शिवमय नजर आया। पोटका और चांडिल जैसे आसपास के इलाकों से इतर, जमशेदपुर शहर में इस बार आस्था और सांस्कृतिक जीवंतता का एक अनोखा रंग देखने को मिला। सुबह तड़के 5 बजे जैसे ही शहर के प्रमुख शिवालयों के कपाट खुले, श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जलाभिषेक के लिए उमड़ पड़ी, जो देर शाम तक अनवरत चलती रही।

दोमुहानी घाट से शिवालयों तक नंगे पांव पदयात्रा
​इस बार के आयोजन का मुख्य आकर्षण श्रद्धालुओं का स्वर्णरेखा नदी और दोमुहानी घाट से पवित्र जल उठाकर नंगे पांव मंदिरों तक जाना रहा। गाजे-बाजे और भक्ति भजनों के बीच निकाली गई भव्य कलश यात्राओं ने पूरे शहर को उत्सव के माहौल में ढाल दिया।

परंपरा, रंग और नारी शक्ति का उत्कर्ष
​शहर की इस पावन बेला में महिलाओं और युवतियों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
पारंपरिक परिधान: अधिकांश श्रद्धालु हरे, पीले और केसरिया परिधानों में सजे-धजे नजर आए।
पूजा-अर्चना: भगवान आशुतोष को जल, गंगाजल, कच्चा दूध, शहद, बेलपत्र, भांग और धतूरा अर्पित कर पूरे विधि-विधान से सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की गई।
संध्या श्रृंगार: देर शाम शहर के प्रमुख शिवालयों में बाबा भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
​बच्‍चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी ने जमशेदपुर की पहली सोमवारी को ऐतिहासिक और भव्य बना दिया।

Share This Article