डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : टाटा स्टील में पिछले डेढ़ साल से लंबित पड़े वेतन समझौते (वेज रिवीजन) ने अब एक नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। कंपनी के करीब 10 हजार ओल्ड और न्यू सीरीज ग्रेड कर्मचारियों के हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए न्यू सीरीज के कमेटी मेंबरों ने सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी देकर प्रबंधन और यूनियन नेतृत्व दोनों की नींद उड़ा दी है। 1 जनवरी 2025 से पेंडिंग इस वेज रिवीजन को लेकर कर्मचारियों के भीतर सुलग रहा असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। टाटा वर्कर्स यूनियन और कंपनी प्रबंधन के बीच चल रही आधिकारिक बातचीत के समानांतर, न्यू सीरीज ग्रेड के प्रतिनिधि अपनी मांगों को लेकर मुखर हो गए हैं।
यूनियन अध्यक्ष के आवास पर दस्तक, सौंपा मांग पत्र
सोमवार की सुबह टाटा स्टील की श्रमिक राजनीति के लिए बेहद गहमागहमी वाली रही। न्यू सीरीज ग्रेड के कमेटी मेंबरों ने एकजुटता दिखाते हुए टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव कुमार चौधरी के आदित्यपुर स्थित आवास पर सीधे दस्तक दी। वहां उन्होंने 12 प्रमुख कमेटी सदस्यों के हस्ताक्षरों वाला एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में आम कर्मचारियों की बुनियादी भावनाओं और वेतन समझौते से जुड़ी महत्वपूर्ण मांगों का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
कमेटी सदस्यों की 3 प्रमुख और बुनियादी मांगें
महंगाई भत्ता : वर्तमान व्यवस्था में डीए प्रति पॉइंट 3 रुपये से बढ़ाकर सीधे 6 रुपये किया जाए।
न्यूनतम गारंटीड बेनिफिट : कर्मचारियों के आर्थिक संरक्षण के लिए एमजीबी किसी भी परिस्थिति में 30 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए।
वार्षिक वेतन वृद्धि : सालाना इंक्रीमेंट को मूल वेतन का स्पष्ट रूप से 3 प्रतिशत निर्धारित किया जाए।
कमेटी सदस्यों का कड़ा तर्क है कि अगर इन वित्तीय मांगों को स्वीकार करना किन्हीं कारणों से संभव नहीं था, तो वेतन समझौते की अवधि को अनावश्यक रूप से बढ़ाने के बजाय महज पांच वर्ष तक ही सीमित रखा जाना चाहिए था।
आगामी यूनियन चुनाव और शीर्ष नेतृत्व पर संकट
टाटा वर्कर्स यूनियन की 214 सदस्यीय कमेटी में कुल 84 कमेटी मेंबर अकेले न्यू सीरीज ग्रेड से ताल्लुक रखते हैं। इतनी बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों की नाराजगी सीधे तौर पर यूनियन के भीतर एक बड़े आंतरिक संकट और असंतोष का संकेत दे रही है। कमेटी सदस्यों का साफ आरोप है कि यूनियन के शीर्ष नेतृत्व द्वारा उनके महत्वपूर्ण सुझावों पर वैसी गंभीरता नहीं दिखाई गई, जैसी अपेक्षित थी।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का सीधा असर आगामी यूनियन चुनाव पर पड़ेगा। टाटा वर्कर्स यूनियन की 3 साल वाली कार्यकारिणी का चुनाव दिसंबर या जनवरी 2027 में होना तय है। अगर एनएस ग्रेड के इन 84 कमेटी मेंबरों की नाराजगी को वक्त रहते दूर नहीं किया गया, तो वर्तमान शीर्ष नेतृत्व को चुनाव में इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

