​क्या आपकी कंपनी भी इस लिस्ट में है? जानें भारतीय कर्मचारियों की पहली पसंद कौन सी 10 कंपनियां हैं

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: भारतीय पेशेवरों की प्राथमिकताएं अब तेजी से बदल रही हैं। नौकरियां चुनने के मामले में अब सिर्फ भारी-भरकम सैलरी पैकेज ही काफी नहीं है, बल्कि वर्क-लाइफ बैलेंस सबसे बड़ा पैमाना बन चुका है। हाल ही में जारी हुए प्रतिष्ठित ‘रैंडस्टैड एम्प्लायर ब्रांड रिसर्च (REBR) 2026’ के आंकड़ों से यह साफ हुआ है कि कर्मचारी अब उन कंपनियों की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं जो बेहतर कार्य संस्कृति और मानसिक सुकून देती हैं।

गूगल का दबदबा बरकरार, टाटा दूसरे स्थान पर
​देश के सबसे आकर्षक नियोक्ता ब्रांड्स की फेहरिस्त में टेक दिग्गज गूगल ने पहला स्थान हासिल किया है। वहीं अपनी कर्मचारी-हितैषी नीतियों के लिए मशहूर टाटा समूह दूसरे पायदान पर रहा, जबकि ई-कॉमर्स क्षेत्र की बड़ी कंपनी अमेजन को तीसरा स्थान मिला है। रैंडस्टैड इंडिया के प्रबंध निदेशक नारायण अय्यर का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में नियोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच का समीकरण पूरी तरह बदल चुका है। अब नौकरीपेशा लोग किसी एक वित्तीय फायदे के बजाय अपने संपूर्ण कार्य अनुभव को प्राथमिकता दे रहे हैं।

टॉप-10 सबसे पसंदीदा कंपनियां
​गूगल (Google)
​टाटा समूह (Tata Group)
​अमेजन (Amazon)
​सैमसंग इंडिया (Samsung India)
​इंफोसिस (Infosys)
​रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries)
​आईटीसी (ITC)
​हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL)
​महिंद्रा एंड महिंद्रा (Mahindra & Mahindra)
​डेल टेक्नोलॉजीज (Dell Technologies)

वेतन से ज्यादा ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ की मांग
​सर्वेक्षण के अनुसार 60 फीसदी पेशेवरों ने ‘वर्क-लाइफ बैलेंस’ को कंपनी चुनने का सबसे अहम कारण बताया।
​समान अवसर: 59%
​करियर में ग्रोथ: 55%
​प्रतिस्पर्धी सैलरी व सुविधाएं: 55%
​कंपनी की साख : 53%

नौकरी बदलने का मन बना रहे लगभग आधे पेशेवर
​रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला आंकड़ा यह भी सामने आया है कि देश के करीब 46 प्रतिशत पेशेवर अगले 6 महीनों में अपनी नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा 32 फीसदी लोग बीते 6 महीनों के भीतर ही पहले से अपनी जॉब बदल चुके हैं।

रिजाइन करने की 3 बड़ी वजहें
​वर्क-लाइफ बैलेंस में कमी (49%)
​करियर में ग्रोथ का न होना (42%)
​उम्मीद से कम सैलरी (41%)

टाटा समूह का ऐतिहासिक ‘पीपुल फर्स्ट’ दृष्टिकोण
​टाटा समूह का शीर्ष पायदानों में बने रहना उसकी दशकों पुरानी ‘कर्मचारी-प्रथम’ नीति का प्रमाण है। टाटा ने जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहरों से देश में 8 घंटे की कार्य अवधि, पीएफ और मातृत्व अवकाश जैसी व्यवस्थाओं की शुरुआत तब की थी, जब इनके लिए कोई कड़े कानून भी नहीं बने थे। आज भी भारतीय पेशेवरों के लिए टाटा का नाम जॉब सिक्योरिटी और पेशेवर सम्मान का बड़ा प्रतीक माना जाता है।

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