डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : केबल कंपनी के पुनरुद्धार और देनदारी से जुड़े पेचीदा मामले में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल की चेयरमैन पीठ ने सुनवाई को 5 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित सिविल अपील को ध्यान में रखते हुए अगली तारीख तय की है।
सुनवाई के दौरान उठे कई बड़े सवाल
अपीलेट ट्रिब्यूनल के समक्ष मजदूरों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने कई नए और गंभीर तथ्य प्रस्तुत किए।
कंपनी की वास्तविक देनदारी: दिल्ली हाईकोर्ट के 6 जनवरी 2016 के ऐतिहासिक आदेश के मुताबिक, इंकैब पर बैंकों की कुल देनदारी महज ₹21.63 करोड़ थी। यह ऋण वर्ष 1992 से पहले का था, जो 1995 के बाद समाप्त हो चुका था।
सुरक्षित कानूनी स्थिति: इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगाई थी, जिससे यह निर्णय स्थायी हो चुका है। कानून के अनुसार, इस स्थिति में केवल मजदूर ही ‘कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स’ के वैध सदस्य बनते हैं।
फर्जी दावों का आरोप
अधिवक्ता ने पीठ के सामने आरोप लगाया कि पूर्व आरपी पंकज टिबरेवाल ने फर्जीवाड़ा करते हुए तीन संदिग्ध कंपनियों—कमला मिल्स लिमिटेड, फल्गु इन्वेस्टनेट और पेगासस एसेट रिकंस्ट्रक्शन—के 2,009 करोड़ रुपये के फर्जी दावों को स्वीकार किया। इसी आधार पर उन्होंने ट्रॉपिकल वेंचर्स कंपनी लिमिटेड के ₹3,074 करोड़ के फर्जी दावे को भी मंजूर कर लिया और गैर-कानूनी तरीके से CoC का गठन कर दिया।
ट्रॉपिकल वेंचर्स पर शिकंजा: NCLAT ने 30 जून के अपने आदेश में ट्रॉपिकल वेंचर्स के ₹1,646 करोड़ के दावे को खारिज करते हुए केवल ₹85 करोड़ का दावा ही विचारणीय माना था। हालांकि, सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने लाई गई कि ट्रॉपिकल वेंचर्स का ₹85 करोड़ का दावा भी पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है।
कर्मियों के खाते में भेजी गई बकाया राशि
उधर जमशेदपुर और पुणे के 1,616 कर्मचारियों के खाते में कोर्ट द्वारा मंजूर दावों की राशि का भुगतान शुरू कर दिया गया है।
पहला चरण: 14 जुलाई को कर्मचारियों के खाते में ₹2-2 लाख भेजे गए थे।
दूसरा चरण: हाल ही में मजदूरों के खातों में ₹3-3 लाख की अतिरिक्त राशि ट्रांसफर की गई है।

advertisement

