अमेरिका की पूर्व राष्ट्रीय खुफिया निदेशक का दावा- वुहान लैब में ‘गेन ऑफ फंक्शन’ रिसर्च के लिए अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे का हुआ इस्तेमाल
अमेरिका की निवर्तमान राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) Tulsi Gabbard ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिन कुछ गोपनीय दस्तावेज और संचार रिकॉर्ड सार्वजनिक किए हैं। गबार्ड ने दावा किया है कि इन दस्तावेजों से पता चलता है कि अमेरिका के पूर्व शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी Anthony Fauci ने अमेरिकी करदाताओं के लाखों डॉलर वुहान स्थित लैब में खतरनाक “गेन ऑफ फंक्शन” रिसर्च के लिए उपलब्ध कराए थे।
गबार्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वह अपने कार्यकाल के अंतिम दिन ऐसे दस्तावेज जारी कर रही हैं, जो पहले कभी सार्वजनिक नहीं हुए। उनके अनुसार, इन दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि खुफिया समुदाय के कुछ राजनीतिक रूप से प्रभावित अधिकारियों ने फौसी के साथ मिलकर उनके कार्यों से जुड़े तथ्यों और कोविड-19 के कथित लैब-लीक सिद्धांत को दबाने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फौसी ने वर्ष 2024 में कांग्रेस के समक्ष शपथ के दौरान गलत जानकारी दी थी।
गबार्ड का दावा है कि चीन के Wuhan Institute of Virology को चमगादड़ कोरोना वायरस पर “गेन ऑफ फंक्शन” रिसर्च के लिए फंडिंग दी गई थी और बाद में यही रिसर्च वैश्विक महामारी की वजह बनी। हालांकि, इस दावे को लेकर वैज्ञानिक समुदाय और विभिन्न अमेरिकी एजेंसियों में लंबे समय से मतभेद रहे हैं। कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर अब तक कोई सर्वसम्मत निष्कर्ष सामने नहीं आया है। कुछ एजेंसियां लैब-लीक सिद्धांत को सीमित भरोसे के साथ मानती हैं, जबकि कई वैज्ञानिक प्राकृतिक उत्पत्ति की संभावना को भी सही मानते हैं।
इससे पहले भी गबार्ड ने अमेरिका द्वारा विदेशों में संचालित और वित्तपोषित जैविक प्रयोगशालाओं को लेकर कई दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। हालिया खुलासे के बाद एक बार फिर कोरोना महामारी की उत्पत्ति, वुहान लैब और अमेरिकी फंडिंग को लेकर बहस तेज हो गई है।
नोट: यह खबर तुलसी गबार्ड द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों और उनके दावों पर आधारित है। इन आरोपों पर अलग-अलग विशेषज्ञों और संस्थाओं की राय भिन्न है तथा सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी विवाद का विषय बनी हुई है।

