आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बिहार में सरगर्मी तेज हो चुकी है। इसी कड़ी में विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ 4 और 5 अक्टूबर को बिहार का दौरा करेंगे। जहां वो मुख्य निर्वाचन अधिकारी और अन्य राज्य अधिकारियों के साथ चुनाव की तैयारियों को लेकर बैठक करेंगे। पटना में भारत निर्वाचन आयोग राज्य की राजनीतिक पार्टियों के साथ भी एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। हालांकि, इस अहम बैठक के लिए राज्य की सभी प्रमुख पार्टियों को आमंत्रित नहीं किया गया है।

चुनाव योग की ओर से बुलाई गई बैठक पटना के होटल ताज में निर्धारित की गई है, जिसका समय सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक रहेगा। इस बैठक का उद्देश्य आगामी चुनाव के संबंध में विभिन्न राजनीतिक पक्षों के विचारों को जानना और तैयारियों की समीक्षा करना है। बैठक की अध्यक्षता मुख्य चुनाव आयुक्त करेंगे।
इन दलों को नहीं आया बैठक का बुलावा
4 अक्टूबर को पटना में होने वाली बैठक में भारत निर्वाचन आयोग राज्य के मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से चुनावी प्रक्रिया और तैयारियों को लेकर सुझाव लेगा। दिलचस्प बात यह है कि आयोग ने 3 अहम दलों को बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया है। सूची में जिन पार्टियों के नाम नहीं हैं, उनमें मुकेश सहनी की पार्टी ‘वीआईपी’ (विकासशील इंसान पार्टी), उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी ‘आरएलएम’ (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) और जीतन राम मांझी की पार्टी ‘हम’ (हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा) शामिल हैं।
इन दलों को मिला न्योता
अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अमित कुमार पांडेय के द्वारा जारी किए गये पत्र में जिन राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को बैठक में शामिल होने का निमत्रण मिला है, उनमें आम आदमी पार्टी (आप), बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी), भारतीय जनता पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट) – सीपीआई (एम), इंडियन नेशनल कांग्रेस , नेशनल पीपुल्स पार्टी , जनता दल (यूनाइटेड), राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी, लोक जन शक्ति पार्टी (रामविलास), राष्ट्रीय जनता दल, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट-लेनिनिस्ट) लिबरेशन शामिल हैं।
इन दलों को नहीं मिला न्योता?
मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी), उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) और जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम), ये तीनों दल हाल के वर्षों में राज्य की सियासत में प्रभावी भूमिका निभा चुके हैं। ऐसे में इन्हें निमंत्रण सूची से बाहर रखा जाना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

