December 1, 2021

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तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संस्कृति सदन सत्र का आयोजन शुरू

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जमशेदपुर। अंतर्राष्ट्रीय संस्कृति संसद का आयोजन गंगा महासभा एवं श्री काशी विद्वत परिषद के द्वारा वाराणसी के रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में 12 से 14 नवंबर तक तीन दिवसीय आयोजन के प्रथम दिवस के सत्र आयोजित किया गया । अंतर्राष्ट्रीय संस्कृति संसद में संपन्न हुए सत्र के बारे में बताते हुए गंगा महासभा बिहार-झारखंड के उपाध्यक्ष धर्म चंद्र पोद्दार ने वाराणसी से जानकारी दी कि उद्घाटन सत्र के शुभारंभ में हनुमान चालीसा परिवार की ओर से हनुमान चालीसा का पाठ किया गया । ततपश्चात दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया । इस मध्य संस्कृत संकाय की कन्याओं द्वारा मंगलाचरण पाठ किया गया । यह आयोजन अखिल भारतीय सन्त समिति व श्री काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में हो रहा है । उद्घाटन सत्र में ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज , दैनिक जागरण के उत्तर प्रदेश के संपादक आशुतोष शुक्ला , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार जी , अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नव निर्वाचित अध्यक्ष श्रीमंत रविन्द्र पूरी जी महाराज , राज्यसभा सांसद व आयोजन समिति की अध्यक्ष रूपा गांगुली , गंगा महासभा व अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती जी , दंडी स्वामियों की संस्था के अध्यक्ष स्वामी विमल देव जी व अनेक दंडी स्वामी , रामानंदाचार्य स्वामी राजराजेश्वराचार्य जी , निर्मल पंचायती अखाड़ा के सभापति , उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग के मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी जी , विहिप के संरक्षक , अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकरपुरी जी महाराज , माइक्रो टेक के चेयर मैन , अनेक संत व विद्वान उपस्थित रहे । सभी आगत अतिथियों को गंगाजल की लुटिया, माला व अंगवस्त्रम भेंट कर स्वागत किया गया । विदित हो कि दैनिक जागरण के संपादक स्व० नरेंद्र मोहन की स्मृति में यह संस्कृति संसद का आयोजन प्रति दो वर्ष पर किया जाता हैं । बताया कि यह चौथी संस्कृति संसद है । पोद्दार ने बताया कि संस्कृति संसद में तय किया गया है कि यहां पारित किये गए प्रस्तावों को पास कराना सभी संतो की जिम्मेवारी है । पोद्दार ने बताया कि प्रश्न काल भी हुआ । इसमें बताया गया कि गुणों के आधार पर ही ब्राह्मण होते है । विश्वामित्र राजपूत थे लेकिन गुणों के कारण ब्राह्मण कहे गए । बताया कि पूरे क्षेत्र को खूब सजाया गया था । ‘संस्कृति पर्व’ नामक विशेषांक का लोकार्पण भी किया गया । पॉलैंड से योगाचार्य शास्त्री जी ने भी अपने विचार सनातन धर्म के बारे मे रखे ।

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