कोयल, सोन, अमानत और औरंगा नदियों से कर रहे तस्करी, NGT रोक से पहले बालू स्टॉक करने की होड़
पलामू जिले में अवैध बालू कारोबार अब पूरी तरह बेलगाम होता नजर आ रहा है। जिले की कोयल, अमानत, औरंगा, सोन और बांकी जैसी प्रमुख नदियों से बड़े पैमाने पर बालू का अवैध उठाव कर उसे बिहार, यूपी और झारखंड के अन्य जिलों में भेजा जा रहा है। प्रशासनिक दावों और कार्रवाई के बावजूद हर रात करीब 500 ट्रैक्टर और दर्जनों हाइवा बालू लोड कर सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार इस अवैध कारोबार से सरकार को हर महीने करीब 8 से 10 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं दूसरी ओर लगातार हो रहे अवैध खनन से नदियों का इको सिस्टम भी तेजी से तबाह हो रहा है।
NGT की रोक से पहले तेजी से हो रहा स्टॉक
बताया जा रहा है कि 10 जून से एनजीटी (NGT) की रोक लागू होने वाली है। ऐसे में बालू तस्कर अभी से बड़े पैमाने पर अवैध उठाव कर बालू का स्टॉक जमा करने में लगे हुए हैं। रात के अंधेरे में नदी घाटों पर ट्रैक्टर और हाइवा की लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
सतबरवा में बिना वैध घाट के धड़ल्ले से उठाव
सतबरवा प्रखंड में एक भी वैध बालू घाट संचालित नहीं है, इसके बावजूद औरंगा नदी के सलैया से धमधमवा तक करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में लगातार अवैध खनन जारी है। पहले यहां 24 घंटे खनन होता था, लेकिन प्रशासनिक दबाव के बाद अब रात में धंधा चलाया जा रहा है। बालू की कीमत बढ़कर करीब 3000 रुपये प्रति ट्रैक्टर पहुंच चुकी है।
हुसैनाबाद में बिना टेंडर के चल रहा खेल
हुसैनाबाद क्षेत्र में सोन नदी के दंगवार, डुमरहथा, बड़ेपुर, बुधुआ, देवरी, पुरनाडीह, सोनपुरा, परता, कबरा और रानी देवा समेत कई घाटों का अब तक टेंडर नहीं हुआ है। इसके बावजूद इन घाटों से लगातार बालू निकासी जारी है। वहीं कोयल नदी के अधौरा, पंसा, बिहरा और कोल्हुआ घाट से भी खुलेआम अवैध उठाव हो रहा है।
पाटन और रेहला बना अवैध कारोबार का केंद्र
पाटन प्रखंड में भी कोई वैध बालू घाट चालू नहीं हो सका है, लेकिन अवैध सप्लाई धड़ल्ले से जारी है। उपायुक्त द्वारा जारी सूची के बावजूद घाटों का संचालन शुरू नहीं हो पाया है।
इधर विश्रामपुर और नगर परिषद क्षेत्र के रेहला कोयल नदी घाट को अवैध बालू कारोबार का बड़ा हब माना जा रहा है। टेंडर विवादों के कारण कई घाटों का टेंडर रद्द हो चुका है। वहीं जेएसएमडीसी (JSMDC) की बालू डंपिंग योजना भी अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी है।
कई इलाकों में संरक्षण में चल रहा धंधा
उटारी रोड प्रखंड के सिरहा, करकट्टा और सतबहिनी क्षेत्रों में भी अवैध बालू कारोबार जारी है। आरोप है कि पुलिस और प्रशासनिक संरक्षण में यह धंधा फल-फूल रहा है। इसके अलावा बांकी नदी, पांडू प्रखंड के बेलहारा और धुरिया पहाड़ी नदी में भी पूरे साल अवैध खनन चलता रहता है।
प्रशासन का दावा — कार्रवाई जारी
जिला खनन पदाधिकारी सुनील कुमार ने दावा किया है कि पिछले तीन महीनों में अवैध खनन के खिलाफ अभियान चलाकर 42 वाहनों को जब्त किया गया है। साथ ही करीब 18 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है और 6 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
“अगर अब भी नहीं रुका अवैध खनन तो सूख जाएंगी नदियां”
स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि पलामू की नदियां जिले की जीवनरेखा हैं। यदि समय रहते अवैध बालू खनन पर रोक नहीं लगी तो आने वाली पीढ़ियों को सूखी नदियां, बंजर खेत और जल संकट का सामना करना पड़ेगा। भारी बारिश को छोड़ दें तो बालू माफियाओं की “बालू की खेती” पूरे साल जारी रहती है।

