डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के बोड़ाम प्रखंड स्थित धोबनी गांव से एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां समय पर सही इलाज न मिलने और अंधविश्वास के फेर में पड़ने के कारण 5 साल की मासूम बच्ची की मौत हो गई। बच्ची को तेज बुखार था, लेकिन परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और स्थानीय ग्रामीण चिकित्सक से इलाज कराने में समय गंवा दिया। स्थिति जब बेहद गंभीर हो गई, तब तक काफी देर हो चुकी थी और मासूम की जान नहीं बचाई जा सकी।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में चिकनपॉक्स की आशंका
देर रात हुई इस घटना की सूचना मिलने के बाद सुबह पटमदा सीएचसी से एक चिकित्सा दल धोबनी गांव पहुंचा। सीएचसी के डॉ. सोमेन दत्ता ने परिजनों से बातचीत के आधार पर अंदेशा जताया है कि बच्ची की मौत तेज बुखार और चिकनपॉक्स के लक्षणों के कारण हुई होगी। हालांकि समय पर अस्पताल न पहुंचना मौत का मुख्य कारण बना।
गांव में स्वास्थ्य शिविर: 4 लोग मिले मलेरिया पॉजिटिव
घटना के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग ने गांव में विशेष स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाया। जांच के दौरान गांव में मलेरिया के 4 नए मरीज सामने आए हैं।
PF मलेरिया (3 मरीज): इनमें तीन बच्चे शामिल हैं— सुंदर सिंह (12 वर्ष), गौर सिंह (2 वर्ष 9 माह) और तारामणि सिंह (9 वर्ष)।
PV मलेरिया (1 मरीज): गांव की सोमवारी सिंह (पति चंदन सिंह)।
3 बच्चों को एमजीएम अस्पताल किया गया रेफर
स्वास्थ्य स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पटमदा सीएचसी प्रभारी डॉ. आर.के. सिंह ने PF मलेरिया से पीड़ित तीनों बच्चों को बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया है। वहीं PV मलेरिया से पीड़ित महिला का इलाज गांव में ही दवा देकर किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की अपील: बुखार या बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें। अंधविश्वास, झाड़-फूंक और अप्रमाणित झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर में पड़कर अपनों की जिंदगी जोखिम में न डालें।

