टाटा साम्राज्य की ‘साइलेंट पावर’: कौन हैं माया टाटा, जो चुपचाप संभाल रही हैं रतन टाटा की विरासत?

Manju
By Manju
2 Min Read

डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : टाटा समूह के ‘संस्थापक दिवस’ पर जब नोएल टाटा के साथ उनकी 36 वर्षीया बेटी माया टाटा नजर आई, तो कॉरपोरेट जगत की निगाहें उन पर टिक गई। सादगी और गोपनीयता पसंद करने वाली माया को अब टाटा समूह की ‘अगली बड़ी शक्ति’ के रूप में देखा जा रहा।

दो दिग्गज विरासतों का संगम
माया टाटा सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय बिजनेस इतिहास के दो सबसे बड़े घरानों का मिलन बिंदु है। वह टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा की बेटी और रतन टाटा की भतीजी हैं। वह दिवंगत उद्योगपति साइरस मिस्त्री की भांजी हैं।

शिक्षा और ‘टाटा न्यू’ में बड़ी भूमिका
लंदन के प्रतिष्ठित बेज बिजनेस स्कूल और यूनिवर्सिटी ऑफ वार्विक से पढ़ीं माया ने अपने करियर की शुरुआत जमीन से जुड़कर की। उन्होंने सीधे किसी बोर्ड रूम में बैठने के बजाय टाटा कैपिटल में एक एनालिस्ट के रूप में काम सीखा।

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि ‘टाटा न्यू’ ऐप की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बनना रही है। टाटा समूह के इस महत्वाकांक्षी ‘सुपर ऐप’ को धरातल पर उतारने में माया ने पर्दे के पीछे से अहम तकनीकी और रणनीतिक भूमिका निभाई है।

ट्रस्ट बोर्ड में बढ़ता कद: क्या यही है भविष्य की तैयारी?
जनवरी 2025 में एक बड़ा घटनाक्रम हुआ, जब माया और उनकी बड़ी बहन लिआ को सर रतन टाटा इंडस्ट्रियल इंस्टीट्यूट के ट्रस्टी बोर्ड में शामिल किया गया।

खास बात: नोएल टाटा के तीनों बच्चे—लिआ, माया और नेविल—अब टाटा के छोटे ट्रस्टों में अपनी जगह बना चुके हैं। जानकारों का मानना है कि उन्हें मुख्य ट्रस्टों (टाटा ट्रस्ट्स) की बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जा रहा है।

रतन टाटा का अटूट भरोसा
अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद समूह एक नए दौर में है। अपने जीवनकाल में ही रतन टाटा ने नोएल के तीनों बच्चों को अपना समर्थन दिया था। माया की कार्यशैली बिल्कुल टाटा संस्कृति के अनुरूप है—’कम बोलना और काम से जवाब देना।’

Share This Article