50 सीसीटीवी कैमरे और एक वायरल वीडियो: जमशेदपुर पुलिस ने ऐसे बेनकाब किया ‘संतानहीन’ अपहरणकर्ता दंपती को

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर:जमशेदपुर के व्यस्त साकची बाजार से लापता हुई तीन वर्षीय मासूम आफरीन को पुलिस ने आखिरकार दो सप्ताह की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित ढूंढ निकाला है। यह मामला केवल एक मासूम की बरामदगी का नहीं, बल्कि पुलिस की हाई-टेक तफ्तीश, सोशल मीडिया की ताकत और एक मां के सब्र की जीत की दास्तान है। पुलिस ने इस मामले में कपाली के रहने वाले अब्दुल जसीम उर्फ लखन (43 वर्ष) और उसकी पत्नी अफसाना बेगम (30 वर्ष) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

बाजार में खरीददारी के दौरान हुई थी गायब
​घटना 26 मई की है, जब आफरीन अपने माता-पिता के साथ साकची बाजार में खरीददारी करने आई थी। इसी दौरान वह अचानक लापता हो गई। आफरीन के पिता मोहम्मद इम्तियाज ने साकची थाने में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया, जिसका नेतृत्व पुलिस उपाधीक्षक कर रहे थे।

10 साल का सूनापन और खौफनाक फैसला
​पुलिस की शुरुआती पूछताछ में जो वजह सामने आई, उसने सबको चौंका दिया। आरोपी अब्दुल जसीम कपाली में एक मोबाइल की दुकान चलाता है। शादी के 10 साल बीत जाने के बाद भी इस दंपती की कोई संतान नहीं थी। संतान न होने के इसी डिप्रेशन और तड़प में उन्होंने एक खौफनाक कदम उठाने की साजिश रची। 26 मई को जब वे साकची बाजार पहुंचे, तो उनकी नजर नन्हीं आफरीन पर पड़ी। सूनेपन को भरने की चाहत में उन्होंने मासूम को अगवा कर लिया और कपाली स्थित अपने घर ले आए।

सोशल मीडिया और सीसीटीवी ने बिगाड़ा खेल
​अपहरणकर्ता बच्ची को एक दिन कपाली में रखने में कामयाब रहे, लेकिन जैसे ही आफरीन के लापता होने की खबर फैली और सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हुई, आरोपी दंपती के होश उड़ गए। पकड़े जाने के डर से अफसाना बेगम बच्ची को लेकर रातों-रात पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में स्थित अपने मायके भाग गई और वहां छिपकर रहने लगी।

पुलिस का ऑपरेशन आफरीन
​सिटी एसपी ललित मीणा ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस अंधेरे केस को सुलझाने के लिए पुलिस टीम ने घटनास्थल और उसके आसपास के 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और तकनीकी साक्ष्यों (साइबर सेल) की मदद ली। संदिग्धों की पहचान पुख्ता होते ही पुलिस टीम ने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया के पुष्टि गांव में छापेमारी कर बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया।

मां की आंखों में लौटे खुशी के आंसू
​पूरे 14-15 दिनों के नरक जैसे इंतजार के बाद जब आफरीन को उसकी मां रुकसार खान की गोद में सौंपा गया तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गई। अपनी कलेजे के टुकड़े को सही-सलामत देखकर मां रुकसार खान ने रोते हुए पुलिस टीम का आभार जताया और इसे कानून व खाकी की बड़ी कामयाबी बताया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

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