झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड (JIPL) की हेसला, मरार स्थित फैक्ट्री में कार्यरत सैकड़ों मजदूर इन दिनों अपने दो माह के बकाया वेतन और ओवरटाइम भुगतान की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। मजदूरों ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए फैक्ट्री गेट जाम कर दिया है।
रविवार को ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) के रामगढ़ जिला सचिव अमल कुमार, जिला नेता सरयू बेदिया और छोटन मुंडा फैक्ट्री पहुंचे और आंदोलनरत मजदूरों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। नेताओं ने मजदूरों की मांगों को जायज बताते हुए खुलकर समर्थन दिया।
मजदूरों का कहना है कि पिछले दो महीनों से उन्हें नियमित 8 घंटे की मजदूरी के साथ ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया गया है। जबकि फैक्ट्री प्रबंधन केवल एक माह का साधारण वेतन देने की बात पर अड़ा हुआ है, जिसे मजदूरों ने अस्वीकार कर दिया है।
ऐक्टू नेताओं ने संयुक्त प्रेस बयान जारी कर कहा कि मजदूर 21 अप्रैल 2026 से अपने बकाया वेतन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने प्रबंधन से मांग की कि सभी मजदूरों को दो माह का पूरा वेतन, हाजिरी और ओवरटाइम सहित भुगतान किया जाए और सभी को काम पर वापस रखा जाए।
नेताओं ने झारखंड सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का हवाला देते हुए बताया कि:
अकुशल मजदूर: ₹783 प्रतिदिन (₹20,358 प्रतिमाह)
अर्ध-कुशल मजदूर: ₹868 प्रतिदिन (₹22,568 प्रतिमाह)
कुशल मजदूर: ₹954 प्रतिदिन (₹24,804 प्रतिमाह)
अति कुशल मजदूर: ₹1,035 प्रतिदिन (₹26,910 प्रतिमाह)
इसके बावजूद फैक्ट्री में मजदूरों से 12-12 घंटे काम लेकर मात्र ₹345 प्रतिदिन भुगतान किया जा रहा है, जो श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है।
ऐक्टू ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मजदूरों का बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो संगठन मजदूरों के समर्थन में सड़कों पर उतरकर आंदोलन को और तेज करेगा।
मजदूरों के बीच बढ़ते असंतोष को देखते हुए क्षेत्र में व्यापक आंदोलन की आहट महसूस की जा रही है। मजदूरों ने “दुनिया के मजदूर एक हो” के नारे के साथ एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए लड़ाई तेज करने का आह्वान किया है।

