राज्यसभा के पांच सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए के सभी प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। इनमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन, आरएलएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और शिवेश राम राज्यसभा सदस्य बन गए हैं। इस राज्यसभा चुनाव के लिए महागठबंधन की ओर से आरजेड़ी के प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह उम्मीदवार थे। अपने इस उम्मीदवार की जीत के लिए तेजस्वी यादव ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। लेकिन, अमरेंद्र धारी सिंह को हार का सामना करना पड़ा।
सोशल मीडिया के जरिए दी सफाई
जब राज्यसभा की वोटिंग शुरू हुई तो तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा के अपने चेंबर में 5 घंटे तक बैठकर लगातार विधायकों से संपर्क करते रहे और खुद मोर्चा संभाल रखे थे। बावजूद इसके आरजेड़ी के एक विधायक वोट देने नहीं पहुंचे तो कांग्रेस के तीन विधायक एक दिन पहले से ही नोट रीचेबल हो गए थे। उसके बाद परिणाम एनडीए के खाते में आ गया। इसके बाद आरोप लग रहे हैं कि विधायकों की खरीद फरोख्त की गई और यही वजह है की महागठबंधन के चार विधायक वोटिंग के दौरान लापता हो गए। वोट नहीं करने वालों में महागठबंधन के चार विधायक हैं, जिनमें वाल्मिकीनगर एमएलए भी शामिल हैं। अब वाल्मिकीनगर से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर सफाई पेश की है
उम्मीदवार के चयन पर उठाया सवाल
इस बीच राज्यसभा चुनाव में वोटिंग से दूर रहे कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने फेसबुक के जरिए सफाई दी है। वोटिंग के दौरान वे बिहार विधानसभा नहीं पहुंचे थे, इसके पीछे का कारण उन्होंने बताया है। सुरेंद्र कुशवाहा ने साफ कहा है कि महागठबंधन की ओर से आरजेडी ने ऐसे वर्ग से आने वाले नेता को प्रत्याशी बनाया जिसका वोट महागठबंधन को नहीं मिलता है, इसलिए उन्होंने वोट देना उचित नहीं समझा।
अपनी पसंद के उम्मीदवार का नाम भी लिया
सुरेंद्र कुशवाहा ने कहा, “एक सीट का मौका था महागठबंधन के पास तो दीपक यादव जी से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता था, वह भी नहीं तो मुकेश सहनी जी को ही, लेकिन उन्हें मौका ना देकर ऐसे वर्ग के व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया जिसका जनाधार महागठबंधन के खिलाफ है।”
क्यों बोले-वोट नहीं देना ही बेहतर समझा
सुरेंद्र कुशवाहा ने कहा कि “इन दोनों में से किसी एक को मौका नहीं देकर ऐसे वर्ग के व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया जिसका जनाधार महागठबंधन के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में होने के कारण मैं NDA का साथ दे नहीं सकता हूं। और राजद ने उम्मीदवार गलत चुन लिया तो मैंने वोट नहीं देना ही बेहतर समझा।”

