क्या राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस विधायकों की अनदेखी तेजस्वी को पड़ी भारी? महागठबंधन में बढ़ी खींचतान

Reena Sharma
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बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव में एनडीए ने सभी सीटों पर जीत दर्ज कर ली। इनमें रामनाथ ठाकुर, नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा और बाकी उम्मीदवारों की जीत हुई, जिससे एनडीए ने राज्यसभा में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली। इस चुनाव में महागठबंधन की रणनीति को उस समय बड़ा झटका लगा जब कांग्रेस के तीन और आरजेडी का एक विधायक वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहे। इन चार विधायकों के नहीं आने से विपक्ष का गणित पूरी तरह बिगड़ गया और एनडीए को बढ़त मिल गई।

कांग्रेस के तीनों विधायक आए सामने

कांग्रेस के तीन विधायक—मनोज विश्वास, मनोहर प्रसाद सिंह और सुरेन्द्र कुशवाहा—राज्यसभा चुनाव में मतदान करने नहीं पहुंचे। राज्यसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद वोटिंग से गायब कांग्रेस विधायक अब सामने आ चुके हैं। कांग्रेस के तीनों विधायकों ने खुलासा कर दिया है कि उन्होंने मतदान क्यों नहीं किया।

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मनोज विश्वास ने उम्मीदवार के चयन पर उठाया सवाल

राज्यसभा चुनाव में वोटिंग से दूर रहे कांग्रेस विधायक मनोज विश्वास ने सफाई देते हुए कहा कि वह एनडीए के संपर्क में नहीं थे और पटना में अपने घर पर ही मौजूद थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कांग्रेस में ही बने रहेंगे। हालांकि, मनोज विश्वास ने महागठबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजद ने ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया, जिनका कोई राजनीतिक अनुभव नहीं है और वह एक बिजनेसमैन हैं। उनका कहना था कि यदि किसी मुसलमान या दलित नेता को प्रत्याशी बनाया जाता-जैसे हिना शहाब, अब्दुल बारी सिद्दकी या कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम-तो वे निश्चित रूप से मतदान करते। उन्होंने यह भी कहा कि इन नामों पर चर्चा चल रही थी, लेकिन अंत में एडी सिंह को उम्मीदवार बना दिया गया। मनोज विश्वास ने आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव को लेकर हुई बैठकों में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम को नहीं बुलाया गया और उन्हें पूरी प्रक्रिया से दूर रखा गया। उनके मुताबिक, राजेश राम ने विधायकों से कहा था कि वे वोट देने या न देने का फैसला स्वतंत्र रूप से लें, इसी के चलते उन्होंने मतदान नहीं किया।

विधायक मनोज विश्वास ने भी बताया कारण

इससे पहले कांग्रेस के एमएमए मनोज विश्वास ने भी मतदान नहीं करने के पीछे पार्टी की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश न होने की बात कही थी। उन्होंने कहा,”सच्चाई यह है कि हमारे प्रदेश अध्यक्ष और बिहार के प्रभारी,की राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी के चयन में कोई दखल नहीं थी। जब हमारे दल के नेता का ही सम्मान नहीं होगा, तो हमें वोट देने का कोई अधिकार नहीं है। बिहार में पहले चल रहा था कि हिना शहाब को प्रत्याशी बनाया जाएगा। फिर कहा गया कि किसी दलित को प्रत्याशी बनाया जाएगा।”

सुरेंद्र कुशवाहा ने बताया- क्यों वोट देना उचित नहीं समथा

वोट नहीं करने वालों में वाल्मिकीनगर एमएलए भी शामिल हैं। वाल्मिकीनगर से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने सोशल मीडिया पर सफाई पेश करते हुए कहा है कि महागठबंधन की ओर से आरजेडी ने ऐसे वर्ग से आने वाले नेता को प्रत्याशी बनाया जिसका वोट महागठबंधन को नहीं मिलता है, इसलिए उन्होंने वोट देना उचित नहीं समझा। सुरेंद्र कुशवाहा ने कहा, “एक सीट का मौका था महागठबंधन के पास तो दीपक यादव जी से बेहतर उम्मीदवार कौन हो सकता था, वह भी नहीं तो मुकेश सहनी जी को ही, लेकिन उन्हें मौका ना देकर ऐसे वर्ग के व्यक्ति को उम्मीदवार बना दिया गया जिसका जनाधार महागठबंधन के खिलाफ है।”

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