शरद पूर्णिमा 2026 का पर्व 25 अक्टूबर, रविवार को मनाया जाएगा। इस मौके पर भागलपुर में धार्मिक आयोजनों के साथ 1960 से चली आ रही निःशुल्क दमा शिविर की परंपरा भी निभाई जाएगी। गंगा घाटों से मंदिरों तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की संभावना है।
चंद्र दर्शन और खीर प्रसाद की खास परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस रात खीर खुले आसमान के नीचे रखने और सुबह प्रसाद के रूप में बांटने की परंपरा है।
1960 से लग रहा निःशुल्क दमा शिविर
भागलपुर के गुरुद्वारा रोड स्थित अग्रसेन भवन में रविवार शाम सात बजे से दमा शिविर आयोजित होगा। आयोजकों के अनुसार, इसकी शुरुआत 1960 में कविराज राधेश्याम मिश्रा और रामजीवन पोद्दार ने की थी।
चित्रकूट की जड़ी-बूटियों से तैयार होती है औषधि
आयोजकों के मुताबिक, शिविर में चित्रकूट पर्वत से लाई गई जड़ी-बूटियों से तैयार औषधि खीर के साथ दी जाती है। इसमें झारखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई क्षेत्रों से मरीज पहुंचते हैं। हालांकि, ऐसी औषधि को दमा का प्रमाणित इलाज नहीं मानना चाहिए।
घाटों और मंदिरों में होंगे विशेष आयोजन
शरद पूर्णिमा पर गंगा घाटों पर स्नान-दान और मंदिरों में पूजा-अर्चना होगी। रंगनाथ स्वामी मंदिर में विशेष भोग, जबकि कुप्पाघाट स्थित महर्षि मेंहीं आश्रम सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर सत्संग और खीर प्रसाद का आयोजन किया जाएगा।
सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क
संभावित भीड़ को देखते हुए घाटों पर सुरक्षा, बैरिकेडिंग और गोताखोरों की तैनाती की व्यवस्था की जा रही है। मंदिरों और प्रमुख सड़कों पर भी पुलिस बल तैनात रहेगा, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।

