​तबाही का सैलाब! MP-UP के बांधों से छोड़े गए पानी ने बढ़ाई गढ़वा की धड़कन, हाई अलर्ट जारी

Manju
By Manju
4 Min Read

डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया: मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण झारखंड के गढ़वा जिले पर बाढ़ का गंभीर संकट मंडराने लगा है। पड़ोसी राज्यों के चार प्रमुख जलाशयों से एक साथ करीब 2.4 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद जिले की सोन और कनहर नदियां उफान पर हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह मुस्तैद हो गया है।

चार बड़े बांधों से छोड़ा गया पानी
झारखंड की सीमा से लगे राज्यों के जल संसाधन विभागों द्वारा लगातार पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है, जिससे नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
बाणसागर बांध (मध्य प्रदेश): इसके 8 रेडियल गेटों से 1,15,700 क्यूसेक पानी सीधे सोन नदी में प्रवाहित किया जा रहा है।
रिहंद बांध (उत्तर प्रदेश): इसके 5 फाटकों और टरबाइन के जरिए कुल 72,960 क्यूसेक पानी रेणु नदी के रास्ते सोन नदी में छोड़ा गया है।
अमवार/कनहर बांध (उत्तर प्रदेश): सोनभद्र स्थित इस बांध का जलस्तर खतरे के निशान (262.30 मीटर) को पार कर चुका है, जिसके बाद इसके 10 रेडियल गेटों को खोल दिया गया है। बांध के बैकवाटर का असर धुरकी के डूब क्षेत्र में साफ दिखने लगा है।
ओबरा बांध (उत्तर प्रदेश): इसका गेट नंबर 8 तीन फीट तक खोलकर पानी को चोपन के पास सोन नदी की तरफ डायवर्ट किया गया है।

अगले 12 घंटे बेहद संवेदनशील
बांधों से छोड़ा गया यह भारी सैलाब तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। भौगोलिक स्थिति के मुताबिक यह पानी खरौंधी, केतार, हरिहरपुर, कांडी और मंझिआव प्रखंडों के तटीय इलाकों से गुजरते हुए बिहार के इंद्रपुरी बराज की ओर बढ़ेगा। जलस्तर में हो रही भारी बढ़ोतरी को देखते हुए अगले 8 से 12 घंटे अत्यंत संवेदनशील माने जा रहे हैं। कनहर नदी का रौद्र रूप और अमवार बांध का बैकवाटर धुरकी के निचले इलाकों में घुसने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

प्रशासन की मुस्तैदी और दिशा-निर्देश
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए गढ़वा के उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्र ने आपात बैठक बुलाई और आपदा प्रबंधन विभाग को 24 घंटे एक्टिव मोड में रहने का निर्देश दिया है। सीमावर्ती प्रखंडों के सभी अंचलाधिकारियों और थाना प्रभारियों को फील्ड में रहकर स्थिति पर नजर रखने को कहा गया है। तटीय गांवों में लाउडस्पीकर के जरिए मुनादी कराकर लोगों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की हिदायत दी जा रही है। सोन और कनहर नदी के जलमार्ग या उसके बीच के टापुओं की ओर जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को केतार और कांडी क्षेत्रों में तटबंधों की मजबूती और जलस्तर की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षित भवनों और राहत शिविरों की पहचान कर ली है और लोगों से अपील की है कि वे नदियों के पास जाने से बचें।

Share This Article