डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली की बैठक के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कतर की मध्यस्थता में करीब 3 घंटे तक लंबी बातचीत हुई। हालांकि दोनों पक्षों के नुमाइंदे आमने-सामने नहीं आए, लेकिन मध्यस्थों के जरिए चले इस दौर ने पश्चिम एशिया की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
परोक्ष बातचीत और मध्यस्थों की भूमिका
UN जनरल असेंबली के दौरान अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के बीच परोक्ष रूप से संदेशों का आदान-प्रदान हुआ। कतर के अधिकारियों ने इसमें मध्यस्थ की मुख्य भूमिका निभाई, जो पूरे दिन दोनों पक्षों के बीच संदेश लेकर आते-जाते रहे। अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने बातचीत के सकारात्मक रहने की बात कही है और मध्यस्थों के जरिए आगे भी यह संवाद जारी रखने की पुष्टि की है।
डोनाल्ड ट्रंप की दो-टूक: ‘डील करो या तबाही के लिए तैयार रहो’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरी कूटनीति के बीच ईरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान के पास अब दो ही रास्ते बचे हैं—या तो अमेरिका के साथ डील करे या फिर गंभीर सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार रहे। उन्होंने हॉर्मुज को पूरी तरह खोलने और बातचीत की टेबल पर लौटने की मांग दोहराई है।
ईरान की शर्तें: क्या खुलेगा हॉर्मुज स्ट्रेट?
एक सीनियर ईरानी अधिकारी के हवाले से मिली रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका सैन्य और आर्थिक दबाव कम करता है, तो ईरान महज 7 दिनों के भीतर दुनिया के सबसे अहम तेल शिपिंग रूट ‘हॉर्मुज स्ट्रेट’ को खोल सकता है। ईरान ने अपनी शर्तें सामने रखते हुए मांग की है कि अमेरिका तुरंत नौसैनिक नाकाबंदी हटाए, विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियां जारी करे और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करे।

