25 सितंबर को देशभर में अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन मनाया जा रहा है। श्रद्धालु भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा कर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण करेंगे। चित्तौड़गढ़ में करीब 50 हजार लोगों के लिए महाप्रसादी की तैयारी की गई है, जिसमें पहली बार ढाई फीट तक की झकोलमा पूड़ी भी बनाई जा रही है।
रवियोग में होगी अनंत पूजा
ज्योतिषाचार्य राकेश झा के अनुसार इस बार अनंत चतुर्दशी पर रवियोग का संयोग है। श्रद्धालु कथा श्रवण के बाद अनंत भगवान की पूजा कर अनंत सूत्र धारण करेंगे।
14 गांठों का धार्मिक महत्व
अनंत डोर की 14 गांठों को 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। परंपरा के अनुसार पूजा के बाद पुरुष दाहिनी और महिलाएं बाईं बांह में अनंत सूत्र बांधती हैं।
विष्णु के स्वरूप की पूजा
अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु को समर्पित पर्व माना जाता है। इस दिन पूजा, कथा श्रवण और भोग अर्पित करने की परंपरा है। अनंत डोर की गांठों में विष्णु के विभिन्न नामों का स्मरण किया जाता है।
महाभारत से जुड़ी मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार वनवास के दौरान युधिष्ठिर को भगवान कृष्ण ने अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी। इसके बाद पांडवों ने अनंत भगवान की पूजा की थी।
गणेश विसर्जन भी आज
अनंत चतुर्दशी के साथ गणेश विसर्जन भी किया जाएगा। धार्मिक परंपरा के अनुसार श्रद्धालु गणपति की पूजा के बाद विधि-विधान से विसर्जन करते हैं।
50 हजार लोगों के लिए महाप्रसादी
चित्तौड़गढ़ में करीब 50 हजार लोगों के लिए महाप्रसादी तैयार की जा रही है। 45 क्विंटल आटे से पूड़ियां बनेंगी। पहली बार 2.5 फीट की झकोलमा पूड़ी के लिए भीलवाड़ा से 15 हलवाइयों की टीम बुलाई गई है।
पांच सब्जियों के साथ अचार
महाप्रसादी में आलू-टमाटर, दाना मेथी, पकौड़ी, नमकीन और टमाटर-मिर्ची के गट्टे की सब्जी के साथ अचार परोसा जाएगा। तैयारी में करीब 140 हलवाई, 60 से 70 मजदूर और समिति के 150 कार्यकर्ता जुटे हैं।

