डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: पश्चिम बंगाल की राजनीति और सांस्कृतिक गलियारों में इन दिनों बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का दौरा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हावड़ा के लिलुआ स्थित रेलवे वर्कशाप ग्राउंड में शुक्रवार से उनकी तीन दिवसीय हनुमंत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। बंगाल में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद यह उनका पहला दौरा है, जिसमें मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी पहले दिन पहुंचकर उनका आशीर्वाद लिया और कथा का श्रवण किया।
राजनीतिक तंज और ‘मन परिवर्तन’ का संदेश
कथा शुरू होने से पहले पत्रकारों से बातचीत करते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने विरोधियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा, ‘कुछ लोग कहते थे कि हमें बंगाल में घुसने नहीं दिया जाएगा, लेकिन लीजिए… हम कथा कहने घुस चुके हैं और अब पूरा बंगाल भगवामय हो चुका है।’ पूर्ववर्ती सरकार और राजनीतिक हालातों पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य राजनीति करना नहीं, बल्कि जनता की सोच बदलना है। बाबा ने कहा, ‘सत्ता परिवर्तन तो होता रहता है, मैं यहां लोगों का मन परिवर्तन करने आया हूं। जिनके मन में भारत के खिलाफ जहर भरा है, हम उनके मन में अमृत भरने आए हैं।’ उन्होंने कहा कि पहले की सरकार के दौरान उन्हें अनुमति नहीं मिलती थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।
यह देश अकबर का नहीं, रघुवर का है
अपने बयानों के लिए मशहूर बाबा बागेश्वर ने मंच से एक बार फिर तीखा सांस्कृतिक और वैचारिक संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह देश अकबर का नहीं बल्कि रघुवर का है। देश की प्राथमिकताओं और राष्ट्रवाद पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग तिरंगे में चांद देखना चाहते हैं, जबकि हमारी चाहत चांद पर तिरंगा देखने की है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में अब तक हुए मतांतरण (धर्म परिवर्तन) पर चिंता जताते हुए घर वापसी का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री शुभेंदु के सामने रखीं तीन बड़ी मांगें
कथा के पहले दिन कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बाबा का स्वागत किया और राज्य की संस्कृति और सनातन धर्म की रक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में 10 लाख लोगों की मौजूदगी में एक विशाल कार्यक्रम आयोजित करने का आमंत्रण भी दिया। कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने मुख्यमंत्री के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं। गंगासागर मेले को राष्ट्रीय मेले का दर्जा दिया जाए। गोमाता को राजमाता घोषित किया जाए। रामनवमी या काली पूजा के दौरान होने वाले उपद्रव और दंगे पूरी तरह बंद हों, ताकि बंगाल में अब दंगों की जगह सिर्फ ‘हर-हर गंगे’ की गूंज सुनाई दे। इस आयोजन में उमड़ी भारी भीड़ यह बता रही है कि पश्चिम बंगाल की जनता में इस धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान को लेकर कितना उत्साह और समर्थन है।

