डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: टाटा मोटर्स के कमर्शियल और पैसेंजर व्हीकल दो अलग-अलग कंपनियों में बंटने के डिमर्जर के बाद जमशेदपुर प्लांट में इस साल पहला बोनस समझौता होने जा रहा है। नए कॉर्पोरेट ढांचे के तहत होने वाले इस पहले समझौते को लेकर कर्मचारियों में जबरदस्त उत्साह और चर्चाएं तेज हो गई हैं। बोनस की रूपरेखा तय करने के लिए आगामी 7 सितंबर को टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन की कमेटी मीटिंग बुलाई गई है।
इस बार क्या है खास?
बढ़ सकता है बोनस का दायरा: वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान स्थायी कर्मचारियों को 12.3 प्रतिशत बोनस (औसत 50,160 रुपये और अधिकतम 75,223 रुपये) मिला था। इस बार कंपनी के बेहतर प्रदर्शन और यूनियन के रुख को देखते हुए बोनस की दर 14% से 16% के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है।
80 हजार के पार अधिकतम राशि: सूत्रों के मुताबिक, अनुमानित बढ़ी हुई दर के आधार पर इस बार कर्मचारियों का अधिकतम बोनस 80 हजार रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है।
बाइ सिक्स युग का अंत: कंपनी में इस बार ‘बाइ सिक्स’ व्यवस्था खत्म होने जा रही है। पिछले साल लगभग 1200 बाइ सिक्स कर्मियों को 8.33 प्रतिशत और सुपरएनुएशन के दायरे में आए करीब 225 कर्मचारियों को 15,085 रुपये का अनुदान प्रदान किया गया था। नए ढांचे के तहत यह पहला मौका है जब व्यवस्था में बदलाव देखने को मिलेगा।
यूनियन की क्या है रणनीति?
टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन के महामंत्री आरके सिंह का कहना है कि कंपनी के बंटवारे और नई प्रणाली के बावजूद कर्मचारियों ने उत्पादन में रिकॉर्ड तोड़ मेहनत की है। यूनियन का प्रयास है कि पिछले साल की तुलना में इस बार कर्मचारियों को कहीं अधिक सम्मानजनक और बेहतर बोनस मिले, ताकि त्योहारी सीजन से पहले कर्मचारियों के चेहरे पर खुशियां लाई जा सकें। कमेटी मीटिंग के बाद यूनियन प्रबंधन को बोनस वार्ता के लिए आधिकारिक मांग-पत्र सौंपेगी।
स्थानीय बाजार को भी रहता है इंतजार
टाटा मोटर्स के बोनस का असर सिर्फ कंपनी के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा फायदा जमशेदपुर और विशेषकर आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के बाजारों को मिलता है। बाजार के जानकारों का मानना है कि कर्मचारियों के हाथ में बोनस का पैसा आते ही शहर की दुकानों, बाइक-कार के शोरूम और इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में भारी रौनक और खरीदारी देखने को मिलती है, जिससे स्थानीय व्यापार को भी जबरदस्त गति मिलती है।

