कटाव ने धार्मिक स्थल और जमीन को निगला, ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश
भागलपुर। गोपालपुर प्रखंड के राघोपुर में गंगा नदी के भीषण कटाव ने विकराल रूप ले लिया है। मंगलवार सुबह तेज धारा की चपेट में करीब 100 वर्ष पुराना ऐतिहासिक चैती दुर्गा मंदिर और बजरंग बली मंदिर का अधिकांश हिस्सा नदी में समा गया। खेत, मकान, तटबंध और पुराने धार्मिक स्थलों के बहने के बाद अब कटाव का रुख पीछे से गुजर रही महत्वपूर्ण रेलवे लाइन की ओर हो गया है। ब्रह्म बाबा स्थान से महादेवपुर घाट तक करीब 500 मीटर के क्षेत्र में नदी का दबाव बना हुआ है।
सदियों पुरानी आस्था के केंद्र के बहने से ग्रामीण नाराज
गंगा के कटाव में चैती दुर्गा मंदिर के समा जाने से ग्रामीणों की धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर में पीढ़ियों से हजारों श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते आ रहे थे। उनका आरोप है कि लंबे समय से कटाव जारी रहने के बावजूद जल संसाधन विभाग की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया गया। बोरियों और जियो बैग्स से किए जा रहे बचाव कार्य गंगा की तेज धारा के सामने नाकाफी साबित हो रहे हैं।
ब्रह्म बाबा से महादेवपुर घाट तक रेलवे लाइन पर संकट
नदी का बदलता रुख अब रेल लाइन की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। ब्रह्म बाबा स्थान से महादेवपुर घाट के बीच करीब 500 मीटर के इलाके में नदी की मुख्य धारा सीधे तट से टकरा रही है। कटाव की रफ्तार में कुछ कमी आने के बावजूद निचली धार लगातार जमीन को खोखला कर रही है। जलस्तर या धारा की दिशा में मामूली बदलाव भी रेलवे ट्रैक को प्रभावित कर सकता है।
रेलवे ट्रैक बचाने के लिए तेज हुआ फ्लड फाइटिंग ऑपरेशन
रेलवे लाइन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन और तकनीकी टीमों ने बचाव कार्य तेज कर दिया है। प्रभावित क्षेत्र में बालू भरे बोरे, जियो बैग्स और बोल्डर पिचिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेषज्ञ अभियंता नदी की गहराई, पानी की गति और धारा की दिशा का तकनीकी आकलन कर रहे हैं, ताकि रेलवे लाइन की ओर बढ़ रहे पानी के दबाव को कम किया जा सके।
बची जमीन बनी रेलवे लाइन की आखिरी ढाल
राघोपुर में बची हुई जमीन अब रेलवे लाइन और गंगा के बीच आखिरी सुरक्षा दीवार जैसी स्थिति में है। ग्रामीणों और तकनीकी जानकारों का मानना है कि जब तक नदी की धारा को नियंत्रित करने के लिए स्थायी ड्रेजिंग या डायवर्जन की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक खतरा बना रहेगा। ऐसे में प्रशासन के सामने धार्मिक स्थलों और ग्रामीण इलाकों के साथ रेलवे लाइन को कटाव से बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

