सीट्स निकालकर बनती थी मवेशी तस्करी की गाड़ी, पुरुलिया से गौवंश चोरी करने वाला अंतरराज्यीय गिरोह बेनकाब

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया : पुरुलिया से गौवंश चोरी और तस्करी के मामले में पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई के दौरान झारखंड के कपाली इलाके के पांच लोगों समेत कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने इनके पास से तस्करी में इस्तेमाल की जा रही छह लग्जरी गाड़ियां (इनोवा, स्कॉर्पियो और बोलेरो) भी बरामद की हैं, जिनमें कई वाहन फर्जी नंबर प्लेट या बिना नंबर के थे। पुलिस ने चोरी किए गए सभी छह गौवंशों को सुरक्षित बरामद कर उनके असली मालिकों को सौंप दिया है।

कैसे हुआ खुलासा?
बेलगुमा पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुरुलिया के पुलिस अधीक्षक कुमार सनी राज ने बताया कि पिछले एक महीने के भीतर जिले के बलरामपुर, आड़षा, बड़ाबाजार, झालदा और आद्रा थाना क्षेत्रों में मवेशी चोरी की कई शिकायतें दर्ज की गई थी। लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच एक स्पेशल ऑपरेशन टीम को सौंपी गई।

जांच के दौरान स्थानीय लोगों द्वारा उपलब्ध कराए गए सीसीटीवी और वीडियो फुटेज से पुलिस को अहम सुराग मिले। इसके आधार पर झारखंड पुलिस के सहयोग से सरायकेला-खरसावां जिले के कपाली और आसपास के ठिकानों पर छापेमारी की गई, जहां से पांच आरोपियों को दबोचा गया। उनकी निशानदेही पर पुरुलिया के दो अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों का विवरण
पुलिस की गिरफ्त में आए सातों आरोपियों की उम्र 19 से 36 वर्ष के बीच है। इनमें मुख्य रूप से झारखंड के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत कपाली के रहने वाले नजरुल मीर, शाहनवाज खान, शेख मीर वसीम खान, मोइन अंसारी और मोहम्मद कबीर शामिल हैं। वहीं, पुरुलिया सदर थाना क्षेत्र के कसाई मोहल्ला के रहने वाले मोहम्मद अनवर और झालदा थाना क्षेत्र के कांटाडी गांव निवासी शेख सोहेब को भी पकड़ा गया है।

अनोखा और शातिर तरीका
एसपी ने बताया कि आरोपी चोरी की वारदातों को अंजाम देने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाते थे। वे गाड़ियों की पिछली सभी सीटें निकालकर जगह बना लेते थे ताकि आसानी से मवेशियों को उसमें लादा जा सके। गिरोह के सदस्य सुनसान रातों में घरों के बाहर बंधे मवेशियों को जबरन अपनी गाड़ियों में ठूंसकर झारखंड ले जाते थे। वहां इन्हें अवैध रूप से वध के लिए गोमांस के रूप में इस्तेमाल किया जाता था या स्थानीय कसाईखानों में बेच दिया जाता था।

फिलहाल पुलिस ने जब्त गाड़ियों के इंजन और चेसिस नंबर वाहन निर्माता कंपनियों को भेज दिए हैं ताकि उनके असली मालिकों का पता लगाया जा सके। इस पूरे नेटवर्क में झारखंड के आरोपी मुख्य रूप से चोरी और परिवहन की कमान संभालते थे, जबकि पुरुलिया के स्थानीय आरोपी रेकी कर चोरी के लिए मवेशियों की जानकारी मुहैया कराते थे।

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