बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण जारी है। इस बीच मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासत भी जारी है। विपक्ष लगातार चुनाव आयोग के इस कदम पर सवाल उठा रहा है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने क बार फिर चुनाव आयोग पर सवाल दागा है। उन्होंने कहा कि बिहार में वोटबंदी की साजिश की जा रही है। चुनाव आयोग कन्फ्यूज है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण कार्य रोका जाना चाहिए।

तेजस्वी यादव ने कहा, बिहार में वोटबंदी की गहरी साजिश। दलित-पिछड़ा-अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक के वोट काटने और फर्जी वोट जोड़ने का खेल शुरू। मोदी-नीतीश संविधान और लोकतंत्र को कुचलने तथा आपके मत का अधिकार छिनने के लिए संकल्पित होकर चुनाव आयोग के माध्यम से कार्य कर रहे है। ये लोग प्रत्यक्ष हार देखकर अब बौखला गए हैं। जब मतदाता का मत ही समाप्त कर देंगे तो काहे का लोकतंत्र और संविधान।
बिहार चुनाव आयोग डाकघर की तरह-तेजस्वी यादव
वहीं, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग से सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि 5 जुलाई को हमने चुनाव आयोग से मुलाकात की थी और उनके सामने अपने सवाल रखे थे। चिंता की बात यह है कि अभी तक हमें चुनाव आयोग से कोई स्पष्टता नहीं मिली है। आप सभी जानते हैं कि बिहार चुनाव आयोग केवल डाकघर की तरह काम करता है और उसे जवाब देने का कोई अधिकार नहीं है। कल चुनाव आयोग ने तीन अलग-अलग निर्देश जारी किए। इससे साबित होता है कि वह भ्रमित है।
चुनाव आयोग के विज्ञापन और ज्ञापन में अंतर-तेजस्वी यादव
तेजस्वी यादव ने कहा कि हमारा गठबंधन भारत के चुनाव आयोग द्वारा जारी विरोधाभासी निर्देशों और विज्ञापनों पर गहरी चिंता व्यक्त करता है। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में संशोधन दलितों, ओबीसी, ईबीसी और अल्पसंख्यकों के वोटों को खत्म करने की गहरी साजिश का हिस्सा है, साथ ही फर्जी मतदाताओं को जोड़ने की सुविधा भी है। उन्होंने दावा किया कि आयोग के विज्ञापन में भी कन्फ्यूजन और विरोधाभास है। 6 जुलाई को चुनाव आयोग के फेसबुक पेज पर 2 पोस्ट किए गए। एक में लिखा कि बिना कागजात के फॉर्म जमा करें, दस्तावेज बाद में जमा कर सकते हैं। दूसरी पोस्ट में कहा गया है कि दस्तावेज समय पर जमा कराएं। महागठबंधन की मांग है कि चुनाव आयोग हर चीज को लेकर आदेश जारी करे।
आधार कार्ड, राशन कार्ड जैसे कागजात क्यों नहीं मान्य-तेजस्वी
तेजस्वी ने सवाल उठाया कि आधार कार्ड, राशन कार्ड जैसे कागजात क्यों नहीं माने जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि बिहार के बहुत से लोग दूसरे राज्यों में काम करते हैं। क्या वो 18 दिन में वापस आकर अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा पाएंगे? क्या सरकार उन्हें वापस लाने का कोई इंतजाम कर रही है या उनका वोट काटना चाहती है?

