2026 से दिल्ली एम्स में इलाज का बदला नियम: अब सामान्य मरीजों को इंतजार, रेफरल मामलों को प्राथमिकता

KK Sagar
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बिना रेफरल और पूर्व अपॉइंटमेंट के एम्स दिल्ली पहुंचने वाले सामान्य मरीजों को अब इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। नव वर्ष से एम्स प्रशासन ने गंभीर और रेफरल मरीजों को उपचार और भर्ती में प्राथमिकता देने की प्रक्रिया को सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है।

एम्स दिल्ली देश का प्रमुख सुपर-स्पेशियलिटी और टर्शियरी केयर संस्थान है, जहां उन मरीजों का इलाज किया जाता है, जिनकी बीमारी जटिल हो या जिनका उपचार अन्य अस्पतालों में संभव न हो।

छोटी बीमारियों से बढ़ता जा रहा मरीजों का दबाव

हकीकत यह है कि प्रतिदिन देशभर से हजारों मरीज सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए एम्स पहुंच रहे हैं। खांसी-जुकाम, हल्का बुखार, त्वचा रोग, सामान्य ईएनटी समस्याएं और पेट दर्द जैसी बीमारियों के मरीज भी बड़ी संख्या में ओपीडी में देखे जा रहे हैं।

इस कारण गंभीर रोगियों के इलाज में देरी हो रही है और अस्पताल की सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।

एम्स का उद्देश्य और जमीनी सच्चाई

एम्स की स्थापना का उद्देश्य जटिल और रेफरल मामलों को उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा देना है, न कि सामान्य बीमारियों का नियमित इलाज। लेकिन मौजूदा स्थिति में एम्स पर पूरे देश के स्वास्थ्य तंत्र का बोझ आ गया है, जिससे इलाज व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

निदेशक की अपील: स्थानीय अस्पतालों का करें उपयोग

एम्स निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने साफ कहा है कि एम्स कोई सामान्य अस्पताल नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि छोटी बीमारियों के लिए जिला या राज्य स्तरीय अस्पतालों में इलाज कराएं, ताकि एम्स में गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर चिकित्सा मिल सके।

आंकड़े बताते हैं एम्स पर कितना भारी बोझ

एम्स प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में अस्पताल में मरीजों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

ओपीडी परामर्श: 1.2 से 1.35 करोड़

दैनिक मरीज संख्या: 30,000 से 40,000

आईपीडी में भर्ती: 1.08 से 1.2 लाख

इमरजेंसी मरीज: 2 से 2.5 लाख

सर्जरी: 50 हजार से अधिक

भारी मरीज संख्या के चलते कई विभागों में बेड ऑक्यूपेंसी 120 प्रतिशत तक पहुंच गई और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा।

कुछ विभागों पर सबसे ज्यादा असर

जनरल मेडिसिन और जनरल ओपीडी में सालाना 30–50 लाख मरीज

ईएनटी विभाग में 50 हजार से अधिक ओपीडी

त्वचा रोग विभाग में लगभग 1.5 लाख मरीज

बाल रोग विभाग में 15–20 लाख ओपीडी और करीब 20 हजार आईपीडी

इन विभागों में सामान्य मरीजों की अधिक संख्या के कारण गंभीर मामलों के लिए समय और संसाधन कम पड़ रहे हैं।

डॉक्टरों पर बढ़ता काम का दबाव

सीमित संख्या में चिकित्सक, बेड और संसाधनों के बीच बढ़ता मरीज भार डॉक्टरों को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक कार्यभार से डॉक्टरों में तनाव और बर्नआउट बढ़ रहा है, जिसका असर इलाज की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।

नई व्यवस्था से सिस्टम सुधारने की कोशिश

एम्स प्रशासन ने स्थिति को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिन पर 2026 से और सख्ती से अमल किया जा रहा है।

रेफरल और ऑनलाइन अपॉइंटमेंट वाले मरीजों को प्राथमिकता

बिना अपॉइंटमेंट मरीजों के लिए लंबा इंतजार

गंभीर मरीजों के लिए तेज ट्रायेज प्रक्रिया

डिजिटल ऑन-काल रोस्टर और बेहतर इमरजेंसी प्रबंधन

टर्शियरी केयर क्यों है खास

टर्शियरी केयर स्वास्थ्य सेवा का उच्चतम स्तर होता है, जहां सुपर-स्पेशियलिस्ट डॉक्टरों द्वारा जटिल और जानलेवा बीमारियों का इलाज किया जाता है। यह स्तर उन मरीजों के लिए होता है, जिनका इलाज प्राथमिक या द्वितीयक अस्पतालों में संभव नहीं होता।

टर्शियरी केयर में दी जाने वाली प्रमुख सेवाएं

हृदय और रक्त वाहिका सर्जरी

मस्तिष्क व रीढ़ की हड्डी की सर्जरी

कैंसर का उन्नत उपचार

किडनी, लिवर और हार्ट ट्रांसप्लांट

गंभीर ट्रॉमा और मल्टी-ऑर्गन फेल्योर का इलाज

आधुनिक आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट

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