अमेरिकी टैरिफ में उतार-चढ़ाव से भारतीय निर्यातकों में अनिश्चितता, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अस्थायी राहत

KK Sagar
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अमेरिका के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों में टैरिफ व्यवस्था को लेकर लगातार बदलाव हो रहे हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों के सामने अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। हाल के महीनों में अमेरिकी टैरिफ दरों में बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं, जिसका सीधा असर भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है।

ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले के बाद भारतीय उत्पादों पर प्रभावी टैरिफ घटकर ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) स्तर पर आ गया है, जो औसतन लगभग 3 प्रतिशत है। इससे पहले अगस्त में यह टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गया था। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत अस्थायी साबित हो सकती है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 प्रतिशत का नया ग्लोबल टैरिफ लागू करने की घोषणा की है, जो जल्द प्रभाव में आ सकता है।

भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद की शुरुआत अप्रैल में हुई थी, जब अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाया। बाद में इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। इसके बाद अगस्त में अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर कुल 50 प्रतिशत तक टैरिफ लागू कर दिया। इस 50 प्रतिशत टैरिफ में 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ और 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क शामिल था, जो भारत द्वारा रूसी तेल आयात से जुड़ा हुआ था।

हालांकि 6 फरवरी 2026 को जारी एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत रूस से तेल आयात से जुड़े अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को हटा दिया गया। इसके बाद भारतीय निर्यात पर प्रभावी टैरिफ घटकर 25 प्रतिशत रह गया। अमेरिकी सरकार के अनुसार, भारत ने रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात रोकने, अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदने और अगले 10 वर्षों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के ढांचे पर सहमति जताई थी। इसी आधार पर यह अतिरिक्त शुल्क समाप्त किया गया।

इस महीने की शुरुआत में दोनों देशों के बीच हुए एक द्विपक्षीय समझौते के तहत टैरिफ को 18 प्रतिशत तक घटाने की उम्मीद जताई गई थी। यह कटौती नए कार्यकारी आदेश और व्यापार समझौते के पहले चरण के लागू होने पर निर्भर थी, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह अमल में नहीं आ सकी। इसी बीच अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन प्रावधानों के तहत लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को रद्द कर दिया, जिससे भारतीय निर्यात पर शुल्क सीधे MFN स्तर पर लौट आया।

गौरतलब है कि टैरिफ बढ़ोतरी से पहले भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर औसत शुल्क लगभग 3 प्रतिशत ही था। मौजूदा हालात में भले ही भारतीय निर्यातकों को अस्थायी राहत मिली हो, लेकिन भविष्य में संभावित नए ग्लोबल टैरिफ को लेकर चिंता बनी हुई है।

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