डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: टाटा समूह के गलियारों में इन दिनों हलचल तेज है। नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक का साम्राज्य संभालने वाली टाटा संस की हालिया बोर्ड बैठक किसी बड़े बदलाव का संकेत दे रही है। खबर है कि चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के विस्तार पर फिलहाल आम सहमति नहीं बन पाई है। इस खींचतान के केंद्र में टाटा ट्रस्ट्स के नए चेयरमैन नोएल टाटा हैं, जिन्होंने बैठक के दौरान कड़े तेवर अपनाए।
बैठक के 3 बड़े ‘फ्लैश पॉइंट्स’
बोर्ड बैठक के दौरान हुई चर्चा के ये तीन बिंदु समूह के भविष्य की दिशा तय कर सकते हैं।
नुकसान पर जवाबदेही: नोएल टाटा ने समूह की कुछ कंपनियों में हो रहे घाटे पर चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि चेयरमैन के प्रदर्शन का आकलन केवल सफलताओं से नहीं, बल्कि कमजोर कड़ियों से भी होना चाहिए।
लिस्टिंग को लेकर लिखित वादा: सबसे चौंकाने वाली मांग टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर रही। सूत्रों के मुताबिक, नोएल टाटा चाहते हैं कि चंद्रशेखरन लिखित में यह आश्वासन दें कि टाटा संस को कभी शेयर बाजार में लिस्ट नहीं किया जाएगा।
वोटिंग बनाम आम सहमति: बैठक में मतभेद इतने गहरे थे कि कुछ निदेशकों ने वोटिंग तक की मांग कर दी, जिसे फिलहाल चंद्रशेखरन की अपील पर टाल दिया गया।
चंद्रशेखरन के सामने खड़ी ‘ट्रिपल’ चुनौतियां
भले ही कई बोर्ड सदस्य चंद्रशेखरन के पिछले रिकॉर्ड और योगदान के पक्ष में हैं, लेकिन पिछले एक साल में हुए इन तीन हादसों ने उनकी राह मुश्किल कर दी है।
एअर इंडिया: अहमदाबाद हादसे के बाद सख्त रेगुलेटरी जांच का सामना।
TCS: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी पर प्राइसिंग का बढ़ता दबाव।
JLR: जगुआर लैंड रोवर पर हुए साइबर अटैक से उत्पादन ठप होना और ब्रिटेन की इकोनॉमी पर असर।
महत्वपूर्ण तथ्य: टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की 66% हिस्सेदारी है। रतन टाटा के निधन के बाद नोएल टाटा की कमान संभालने के साथ ही ट्रस्ट अब समूह के रणनीतिक फैसलों में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
क्या कहता है कार्यकाल का गणित?
एन चंद्रशेखरन ने फरवरी 2017 में कमान संभाली थी। उनका मौजूदा दूसरा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त हो रहा है। आमतौर पर टाटा समूह में कार्यकाल विस्तार पर फैसला काफी पहले ले लिया जाता है, लेकिन इस बार की देरी बाजार विशेषज्ञों को चौंका रही है।

