बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान केन्द्रिय गृहमंत्री अमित शाह ने घुसपैठ पर पूरी तरह से रोक लगाने और घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने का वादा किया था। चुनाव के बाद पहली बार अमित शाह तीन दिन के बिहार दौरे पर पहुंचे। इस दौरान सीमावर्ती जिलों की सुरक्षा, घुसपैठ पर रोक और खुफिया समन्वय पर महामंथन किया गया।
भारत-नेपाल सीमा से जुड़े मुद्दों पर हाई लेवल बैठक
दौरे के अंतिम दिन अमित शाह ने भारत-नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा का रिव्यू करने के लिए पूर्णिया जिले में एक हाई-लेवल मीटिंग की। बैठक में बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, राज्य के डीजीपी, आईजी, सीमावर्ती रेंज के अधिकारी, 12 जिलों के डीएसपी, पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज सहित सीमावर्ती जिलों के डीएम-एसपी तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी शामिल हुए।
सीमा पर होनी वाली समस्याओं पर गहन चर्चा
मीटिंग में सीमा से जुड़े अधिकारियों ने शाह को नेपाल बॉर्डर से होने वाले खतरों और इलाके में गैर-कानूनी घुसपैठ पर विस्तार से अपनी बात रखी। इसपर गृहमंत्री के साथ अधिकारियों की लंबी चर्चा भी हुई। करीब 700 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तकनीकी निगरानी बढ़ाने, खुफिया तंत्र मजबूत करने और अंतर-एजेंसी समन्वय को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।
2030 तक घुसपैठियों को बाहर करने का टारगेट
अमित शाह ने अपनी सरकार के टारगेट का जिक्र करते कहा कि 2030 तक सभी घुसपैठियों को देश के बाहर निकाल देंगे। सीमांचल से घुसपैठियों को हटाने का संकल्प गृह मंत्री ने एसएसबी की 52 वीं बटालियन के बीपीओ भवन का उद्घाटन करने के साथ सीमा सुरक्षा परियोजनाओं की समीक्षा भी की। एसएसबी के कार्यक्रम में गृह मंत्री ने कहा कि सीमांचल को घुसपैठियों से मुक्त किया जाएगा। घुसपैठियों से गरीबों के अनाज और देश के नौजवानों के रोजगार पर असर पड़ता है।

