बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी के पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को लेकर सियासत तेज हो गई है। बिहार सरकार ने राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का आदेश दिया है। यह आवास अब दूसरे मंत्री को नंदकिशोर राम को आवंटित कर दिया गया है। बिहार सरकार के इस फैसले पर राबड़ी देवी बुरी तरह भड़क गईं हैं।
राबड़ी देवी ने बेहद आक्रामक बयान
बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को भवन निर्माण विभाग की ओर से ’10 सर्कुलर रोड’ स्थित सरकारी आवास खाली करने का आधिकारिक नोटिस जारी किया गया है। इस आदेश पर राबड़ी देवी ने बेहद आक्रामक और बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि वो किसी भी कीमत पर इस आवास को खुद से खाली नहीं करेंगी। राबड़ी देवी ने चुनौती देते हुए कहा कि हम तो चाहते हैं कि वो फोर्स (पुलिस बल) बुलाकर इस बंगले को खाली करवाएं।
हम अपनी जगह खाली नहीं करेंगे-राबड़ी देवी
शनिवार दोपहर पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान राबड़ी देवी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हम तो चाहते हैं कि फोर्स बुलाकर खाली करा लें। अगर सरकार को जगह खाली करानी है तो प्रशासन और फोर्स का इस्तेमाल करे, लेकिन हम अपनी जगह खाली नहीं करेंगे। वह अभी नए-नए मुख्यमंत्री बने हैं।
राबड़ी देवी को नया बंगला हो चुका है एलॉट
सरकार ने राबड़ी देवी को इसके बदले पटना के पॉश हार्डिंग रोड इलाके में नया सरकारी बंगला आवंटित किया है। भवन निर्माण विभाग की ओर से जानकारी दी गई है कि 25 नवंबर 2025 को जारी आदेश के तहत नेता प्रतिपक्ष के लिए हार्डिंग रोड स्थित आवास संख्या-39 आवंटित किया गया था। विभाग का कहना है कि नया आवास उपलब्ध कराए जाने के बावजूद राबड़ी देवी ने अब तक सर्कुलर रोड स्थित आवास संख्या-10 खाली नहीं किया है।
10 सर्कुलर रोड अब मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित
वहीं, दूसरी ओर राबड़ी देवी का मौजूदा आवास यानी 10 सर्कुलर रोड अब बिहार सरकार के मंत्री नंद किशोर राम के नाम पर आवंटित कर दिया गया है। विभाग ने कहा है कि ये नया आवंटन सक्षम प्राधिकार की मंजूरी मिलने के बाद ही किया गया है।
सालों से इसी घर में रह रहा लालू परिवार
यह बंगला बिहार की राजनीति में विशेष महत्व रखता है। वर्षों तक यह आवास पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी से जुड़ा रहा। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की कई महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठकों, रणनीतिक चर्चाओं और संगठनात्मक गतिविधियों का यह प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है।

