जमुई। जिले के झाझा अंचल कार्यालय में नामांतरण (म्यूटेशन) मामलों में गंभीर अनियमितता सामने आने के बाद जिलाधिकारी के आदेश पर बड़ी कार्रवाई की गई है। इस मामले में तत्कालीन अंचलाधिकारी समेत तीन अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ झाझा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया है।
जांच समिति का गठन
मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान अंचलाधिकारी निशा सिंह ने थाना में दिए आवेदन में बताया कि जिला दण्डाधिकारी सह समाहर्ता जमुई के निर्देश पर 27 फरवरी 2026 को झाझा अंचल कार्यालय का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान आदेश ज्ञापांक 273/गो., दिनांक 25 फरवरी 2026 के तहत एक जांच समिति का गठन किया गया था। समिति ने 5 मार्च 2026 को अपना जांच प्रतिवेदन जिला प्रशासन को सौंप दिया।
गैरमजरूआ बताकर फिर दूसरे को किया स्वीकृत
जांच प्रतिवेदन में बताया गया है कि तत्कालीन राजस्व कर्मचारी सह प्रभारी राजस्व अधिकारी अवधेश कुमार, रामानंद दास तथा तत्कालीन अंचलाधिकारी अमित कुमार रंजन द्वारा कुछ नामांतरण वादों को यह कहते हुए अस्वीकृत कर दिया गया था कि संबंधित खाता और खेसरा गैरमजरूआ (सरकारी) भूमि की श्रेणी में आता है।
हालांकि बाद में उन्हीं खाता और खेसरा की भूमि का अन्य व्यक्तियों के नाम नामांतरण स्वीकृत कर दिया गया। जांच समिति ने इस प्रक्रिया को अनियमित और संदिग्ध माना है।
CO ने थाने में दिया आवेदन
सीओ निशा सिंह ने अपने आवेदन में कहा है कि वरीय अधिकारियों के आदेश के आलोक में अवधेश कुमार, रामानंद दास और तत्कालीन सीओ अमित कुमार रंजन के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के लिए थाना में आवेदन दिया गया है।
कार्रवाई के बाद बढ़ी हलचल
जमुई जिले के झाझा अंचल में हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद आसपास के कई अंचलों के अधिकारियों और कर्मियों में भी हड़कंप मच गया है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि झाझा की तर्ज पर अन्य अंचलों में भी पिछले कुछ वर्षों के नामांतरण रिकॉर्ड की गहन जांच कराई जाए तो और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
यह मामला अंचल कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें सरकारी जमीन को अवैध तरीके से निजी हाथों में सौंपकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया। प्रशासन अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर आगे और कड़ी कार्रवाई की तैयारी में है।

