नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग ही अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई या किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसका SC दर्जा स्वतः समाप्त हो जाएगा और उसे SC/ST एक्ट के तहत संरक्षण भी नहीं मिलेगा।
🧾 क्या कहा कोर्ट ने?
जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अन्य धर्म अपनाने पर व्यक्ति SC श्रेणी में नहीं आता। ऐसे में धर्म परिवर्तन के बाद SC का लाभ नहीं दिया जा सकता।
📌 किस मामले में आया फैसला?
यह मामला आंध्र प्रदेश से जुड़ा है, जहां पादरी चिंताडा आनंद ने अपने साथ जातिसूचक गालियां और भेदभाव का आरोप लगाया था। उनकी शिकायत पर SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत FIR दर्ज हुई थी।
बाद में आरोपी अक्कला रामिरेड्डी ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर कर FIR रद्द करने की मांग की थी।
हाई कोर्ट के जस्टिस एन. हरिनाथ ने FIR रद्द करते हुए कहा था कि आनंद ईसाई धर्म अपना चुके हैं, इसलिए वे SC का दावा नहीं कर सकते। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को सही ठहराया है।
⛪ धर्म परिवर्तन पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अपीलकर्ता लंबे समय से ईसाई धर्म का प्रचार कर रहा था और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय था। ऐसे में वह SC दर्जे का लाभ नहीं ले सकता।
⚠️ प्रमाणपत्र होने पर भी नहीं मिलेगा लाभ
अदालत ने साफ किया कि यदि किसी व्यक्ति के पास SC प्रमाणपत्र है, लेकिन उसने धर्म परिवर्तन कर लिया है, तो केवल प्रमाणपत्र के आधार पर उसे लाभ नहीं मिलेगा। कोर्ट ने कहा कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था मान्य नहीं है, इसलिए धर्म बदलने पर SC दर्जा समाप्त माना जाएगा।
📊 क्या होगा असर?
इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि धर्म परिवर्तन के मामलों में SC दर्जे को लेकर अब कोई भ्रम नहीं रहेगा। साथ ही SC/ST एक्ट के दायरे में आने के लिए संबंधित धर्म की शर्तें लागू होंगी।

