धनबाद में जिला बाल संरक्षण इकाई की समीक्षा बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त सन्नी राज द्वारा नए बालक गृह का प्रस्ताव तैयार कर सचिव महोदय को भेजने के निर्देश के बाद अब पहले से बने बालक गृह भवन को लेकर बहस तेज हो गई है।
समाजसेवी कुमार मधुरेन्द्र सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा है कि जब 90 लाख रुपये की लागत से तीन मंजिला बालक गृह भवन पहले से तैयार है, तो नए प्रस्ताव की बजाय उस भवन को जीर्णोद्धार कर चालू क्यों नहीं किया जा रहा। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया है तथा पूर्व में कई बार विभागीय अधिकारियों को पत्राचार कर कार्रवाई की मांग की थी।
उन्होंने बताया कि उक्त भवन सहायक श्रमायुक्त कार्यालय बरटांड कार्यालय परिसर के समीप के बाउंड्री से सटा हुआ है। भवन में ग्राउंड फ्लोर समेत कुल 12 कमरे, छह बाथरूम एवं शौचालय की व्यवस्था मौजूद है। उनका कहना है कि भवन रांची स्तर से स्वीकृति एवं पत्राचार के बाद बना था, लेकिन आज तक इसका उपयोग शुरू नहीं हो सका।
कुमार मधुरेन्द्र ने कहा कि “केवल नया प्रस्ताव बनाना समाधान नहीं है। पहले से तैयार सरकारी संपत्ति को उपयोग में लाया जाना चाहिए। 90 लाख रुपये खर्च कर बने भवन को बेकार छोड़ देना सरकारी धन की बर्बादी है।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस संबंध में श्रम, नियोजन एवं कौशल विकास विभाग तथा जिला प्रशासन के बीच पूर्व में पत्राचार हो चुका है। उनके द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों में बाल सुधार गृह भवन के संचालन और उपयोग को लेकर कई बार कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।
समाजसेवी ने प्रशासन से मांग की है कि भवन का शीघ्र जीर्णोद्धार कर उसे बालक गृह के रूप में शुरू किया जाए ताकि जरूरतमंद बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
वहीं जिला प्रशासन की ओर से हालिया समीक्षा बैठक में बाल संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने, रिक्त पदों को भरने तथा नए बालक गृह की दिशा में प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है।
समाजसेवी कुमार मधुरेन्द्र सिंह ने बताया कि जनवरी माह में उनकी तत्कालीन समाज कल्याण विभाग के सचिव मनोज कुमार से टेलीफोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान सचिव ने बालक गृह भवन की वर्तमान स्थिति की जानकारी लेते हुए सभी कमरों की तस्वीरें भी उपलब्ध कराने को कहा था। वर्तमान में मनोज कुमार हजारीबाग प्रमंडल के आयुक्त के रूप में पदस्थापित हैं और धनबाद जिला प्रशासन उनके अधीन आता है। ऐसे में समाजसेवी ने उम्मीद जताई है कि लंबे समय से बंद पड़े इस भवन को चालू कराने की दिशा में अब ठोस पहल हो सकती है।

