डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया: पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के पहले ही दिन उन्होंने प्रशासन में बड़े फेरबदल के संकेत दे दिए हैं। राज्य सरकार ने एक कड़ा फरमान जारी करते हुए सभी विभागों, बोर्डो और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल के दौरान मनोनीत किए गए सदस्यों, निदेशकों और अध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने का आदेश दिया है।
प्रशासन में ‘क्लीन स्वीप’ की तैयारी
राज्य सरकार द्वारा जारी आधिकारिक निर्देश के अनुसार, अब उन गैर-वैधानिक निकायों और संगठनों में कोई भी मनोनीत सदस्य अपने पद पर नहीं बना रह सकेगा जिनकी नियुक्ति पिछली सरकार ने की थी। इस फैसले को सुवेंदु सरकार द्वारा राज्य मशीनरी पर अपनी पकड़ मजबूत करने और सिस्टम को बदलने की दिशा में पहले बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
रिटायरमेंट के बाद जमे अधिकारियों की भी होगी विदाई
नई सरकार का हंटर सिर्फ राजनीतिक नियुक्तियों पर ही नहीं, बल्कि उन नौकरशाहों पर भी चला है जो रिटायरमेंट के बाद भी मलाईदार पदों पर काबिज थे। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जो अधिकारी या कर्मचारी 60 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद पुनर्नियुक्ति या सेवा-विस्तार पर काम कर रहे हैं, उनकी सेवाएं तुरंत समाप्त की जाएं।
पारदर्शिता और नए चेहरों पर जोर
हालांकि सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस बड़े बदलाव का कोई विशिष्ट कारण नहीं बताया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सुवेंदु अधिकारी प्रशासन से पिछली सरकार के प्रभाव को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं। सूत्रों का कहना है कि इस फैसले के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता लाना और ऊर्जावान नए लोगों को अवसर प्रदान करना है।
सभी विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों और प्रधान सचिवों को इस आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री के इस तेवर से साफ है कि आने वाले दिनों में बंगाल की प्रशासनिक व्यवस्था में और भी चौंकाने वाले बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

