किशनगंज के एसडीपीओ गौतम कुमार के काले कारनामों की खुली पोल, महिला मित्र के नाम पर मिले 7 प्लॉट

Neelam
By Neelam
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किशनगंज के एसडीपीओ गौतम कुमार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की बड़ी कार्रवाई मंगलवार को पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में ईओयू की टीम ने डीएसपी के पूर्णिया, किशनगंज और पटना स्थित कुल 6 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। जांच में प्रारंभिक साक्ष्य मिले हैं कि डीएसपी ने अपनी वैध आय से लगभग 60.27% यानी करीब 1.94 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की है।

भ्रष्टाचार के बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश

गौतम कुमार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई ने भ्रष्टाचार के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश किया। जांच में सामने आया है कि 1994 में पुलिस सेवा में आए गौतम कुमार ने सीमावर्ती जिलों जैसे पूर्णिया, अररिया और किशनगंज में अपनी लंबी तैनाती का फायदा उठाकर शराब, कोयला, लॉटरी और सुपारी तस्करों के साथ गहरे संबंध बना लिए थे।

अवैध कमाई छिपाने के लिए निवेश के अलग-अलग रास्ते चुने

गौतम कुमार के विभिन्न ठिकानों पर तलाशी में पूर्णिया स्थित उनके चार मंजिला मकान (करीब 3600 वर्ग फीट) के दस्तावेज मिले, जिसकी अनुमानित लागत 2.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा 25 भूखंडों से जुड़े कागजात बरामद हुए, जिनमें कई बेनामी संपत्तियों की आशंका जताई जा रही है। जांच में बीमा और अन्य वित्तीय संस्थानों में निवेश, महंगे वाहन जैसे Creta और Thar, कीमती घड़ियां और पटना में नर्सिंग होम खोलने की योजना से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। गौतम कुमार ने अपनी अवैध कमाई को छिपाने के लिए निवेश के अलग-अलग और सुरक्षित रास्ते चुने थे।

महिला मित्र के नाम काली कमाई का हिस्सा

भ्रष्टाचार के इस खेल में उन्होंने न केवल अपनी पत्नी रूबी कश्यप और सास पूनम देवी को शामिल किया, बल्कि अपनी महिला मित्र शगुफ्ता शमीम के नाम पर भी काली कमाई का बड़ा हिस्सा निवेश किया। शगुफ्ता के घर से 7 भूखंडों के कागजात, करीब 60 लाख के स्वर्ण आभूषण और बैंक ट्रांजैक्शन के साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसी को सिलीगुड़ी में चाय बागान, नोएडा और गुरुग्राम में संपत्ति से जुड़े सुराग भी मिले हैं।

10 साल पुराना था करीबी रिश्ता

ईओयू की जांच में सामने आया है कि डीएसपी गौतम कुमार और महिला दरोगा शगुफ्ता शमीम के बीच पिछले 10 वर्षों से बेहद करीबी संबंध थे। जानकारी के अनुसार, शगुफ्ता के पिता स्वर्गीय शमीम ठेकेदार के साथ डीएसपी के गहरे पारिवारिक संबंध थे। पिता की मृत्यु के बाद यह संबंध और मजबूत होता गया। वर्ष 2019 में जब शगुफ्ता शमीम बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर बनीं, तब तक दोनों के संबंध पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बन चुके थे।

शगुफ्ता से संपर्क के लिए फर्जी सिम का इस्तेमाल

जांच में यह भी सामने आया है कि डीएसपी अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर शगुफ्ता से संपर्क में रहते थे। साथ ही उन्हें महंगे ब्रांडेड उपहार भी देते थे। बताया जा रहा है कि इस लंबे समय से चल रहे संबंध की जानकारी विभाग के कई अधिकारियों को थी, लेकिन डीएसपी के प्रभाव के कारण कोई खुलकर सामने नहीं आया। अब ईओयू ने साक्ष्यों के आधार पर शगुफ्ता शमीम को भी सह-अभियुक्त बना लिया है।

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