बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य सभा सदस्य के तौर पर शपथ ले ली है और वे जल्द ही सीएम पद से इस्तीफा दे देंगे। इसके बाद एक नए मुख्यमंत्री का चयन होगा और एक नई सरकार बनेगी। इसी बीच नीतीश कुमार के पुराने करीबी और बिहार के वरिष्ठ समाजवादी नेता सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए नीतीश कुमार को आईना दिखाने की कोशिश की है।
सीएम पर बेहद तल्ख लहजे में हमला
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर पूर्व राज्यसभा सांसद शिवानंद तिवारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए निशाना साधा है। उन्होंने सीएम पर बेहद ही तल्ख लहजे में हमला बोला है और उनके नेतृत्व व राजनीतिक शैली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के अंदर कभी इतनी हिम्मत नहीं रही कि वह चुनौतियों का सामना कर पाए। जब भी कठिन क्षण आया, उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया।
कठिन स्थिति में समझौते का रास्ता अपनाने का आरोप
शिवानंद तिवारी ने कहा कि नीतीश कुमार के भीतर वह हिम्मत नहीं दिखती, जो किसी नेता को बड़े निर्णय लेने और कठिन परिस्थितियों में मजबूती से अकेले खड़े रहने की ताकत देती है। उन्होंने लिखा कि नीतीश हमेशा टकराव से बचते रहे और हर कठिन स्थिति में समझौते का रास्ता अपनाते रहे। तिवारी के अनुसार, यह प्रवृत्ति ही उनके राजनीतिक व्यक्तित्व की सबसे बड़ी कमजोरी रही है।
राजनीतिक दृढ़ता का नीतीश में अभाव-शिवानंद तिवारी
शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार के शुरुआती शासनकाल के दो बड़े संकल्पों भूमि सुधार और समान शिक्षा व्यवस्था की याद दिलाई, जिन्होंने कभी बिहार में सामाजिक परिवर्तन की उम्मीद जगाई थी। तिवारी ने लिखा, ‘ये दोनों संकल्प बड़े एजेंडे थे, लेकिन इन्हें पूरा करने के लिए जिस राजनीतिक दृढ़ता और टकराव की तैयारी चाहिए थी, उसका नीतीश में अभाव दिखा। परिणाम यह हुआ कि दोनों ही मुद्दे फाइलों और समितियों में दबकर रह गए।’
वैचारिक रूख पर उठाया सवाल
समाजवादी नेता ने आगे कहा कि एक समय ऐसा था जब उनके भीतर समाजवादी परंपरा की स्पष्ट झलक दिखाई देती थी। महात्मा गांधी, राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण और कर्पूरी ठाकुर की वैचारिक विरासत का प्रभाव उनके सार्वजनिक वक्तव्यों और राजनीतिक रुख में नजर आता था। उन्होंने याद दिलाया कि नीतीश कुमार कभी भाजपा और आरएसएस के खिलाफ मुखर रहे और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता की पहल करते रहे। लेकिन वर्तमान में वही नेता भाजपा के साथ सत्ता में हैं। शिवानंद तिवारी ने इस बदलाव को परिस्थितिजन्य राजनीति से आगे बढ़कर ‘वैचारिक विचलन’ और ‘आत्मसमर्पण’ की संज्ञा दी है।
उनके व्यक्तित्व में रीढ़ का अभाव- शिवनंद तिवारी
शिवनंद तिवारी ने बेहद तल्ख शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, नीतीश कुमार के साथ मेरा जो लंबा अनुभव है, उस आधार पर मैं यह कह सकता हूं कि उनके व्यक्तित्व में रीढ़ का अभाव है। जिस व्यक्ति में रीढ़ नहीं होती, वह कभी सीधा खड़ा नहीं हो सकता। वह हर कठिन क्षण में रास्ता बदलता है, टकराव से बचता है और अंततः समझौते को ही अपनी रणनीति बना लेता है। इसी वजह से उन्होंने भाजपा के आगे समर्पण किया।
जॉर्ज-शरद और दिग्विजय की जिलाई याद
वानंद तिवारी ने अपने बयान में उन नेताओं का भी उल्लेख किया, जिन्होंने नीतीश कुमार के राजनीतिक उदय में भूमिका निभाई थी। जॉर्ज फर्नांडिस, शरद यादव और दिग्विजय सिंह जैसे नामों का जिक्र करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि समय के साथ इन संबंधों में आई दूरी केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक दिशा में परिवर्तन का संकेत भी है।

