बिहार की कमान अब सम्राट चौधरी के हाथ : 15 अप्रैल को लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ

KK Sagar
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बिहार की राजनीति में जारी अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से भाजपा विधायक दल का नेता चुन लिया गया है, जिसके साथ ही यह साफ हो गया है कि वे ही राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। इस फैसले की औपचारिक घोषणा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की।

पटना स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में मंगलवार को आयोजित अहम बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की मौजूदगी रही। निवर्तमान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन दिलीप जायसवाल और मंगल पाण्डेय ने किया। इसके बाद सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर मुहर लगा दी।

केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) विधायक दल की बैठक में इस निर्णय को औपचारिक मंजूरी दी जाएगी। तारापुर से विधायक सम्राट चौधरी ने नेता चुने जाने पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार जताया।

बताया जा रहा है कि सम्राट चौधरी जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे लोकभवन में शपथ ग्रहण समारोह प्रस्तावित है, जिसमें मुख्यमंत्री के साथ दो उपमुख्यमंत्री भी शपथ लेंगे।

गौरतलब है कि नितीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में मुख्यमंत्री पद खाली हो गया था। पिछले कुछ दिनों से नए मुख्यमंत्री को लेकर सियासी हलकों में कई नामों की चर्चा थी, लेकिन अंततः पार्टी ने सम्राट चौधरी पर भरोसा जताया।

सम्राट चौधरी लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं और प्रदेश अध्यक्ष, मंत्री तथा उपमुख्यमंत्री के रूप में अपनी भूमिका निभा चुके हैं। उनकी प्रशासनिक क्षमता और संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

उनके मुख्यमंत्री बनने की खबर से कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है। पार्टी कार्यालयों में जश्न का माहौल है, समर्थक मिठाइयां बांटकर खुशी जाहिर कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर बधाइयों की बाढ़ आ गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला भाजपा की रणनीतिक चाल है, जिसका असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है। अब सभी की नजर नई सरकार की कार्यशैली, कैबिनेट गठन और विकास एजेंडे पर टिकी है, जिससे बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है।

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