जमुई के गिद्धेश्वर पहाड़ियों में मिला प्राचीन सभ्यता का अनोखा खजाना! : नवपाषाण काल से प्रारंभिक इतिहास तक के प्रमाण

KK Sagar
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जमुई बनेगा नया ऐतिहासिक-पर्यटन केंद्र : दुर्लभ शैल चित्रों की खोज

बिहार के जमुई जिले से एक बेहद महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण खोज सामने आई है। जमुई वन प्रमंडल के विशेष अन्वेषण दल ने गिद्धेश्वर पहाड़ियों के दुर्गम शैलाश्रयों में हजारों वर्ष पुराने दुर्लभ शैल चित्रों को खोज निकाला है। ये चित्र नवपाषाण काल से लेकर प्रारंभिक ऐतिहासिक काल तक के बताए जा रहे हैं, जो इस क्षेत्र के प्राचीन मानव जीवन और संस्कृति की अनमोल झलक प्रस्तुत करते हैं।

गिद्धेश्वर वन क्षेत्र, जो अब तक अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था के लिए प्रसिद्ध था, अब प्रागैतिहासिक मानव सभ्यता के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है। इन शैल चित्रों में मानव गतिविधियों, सामूहिक जीवन और वन्य जीवों के चित्रण साफ दिखाई देते हैं, जो उस समय की जीवनशैली को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, नवपाषाण काल मानव सभ्यता का वह दौर था जब इंसान ने स्थायी जीवन, खेती और पशुपालन की शुरुआत की थी। ऐसे में इन चित्रों की खोज यह साबित करती है कि जमुई क्षेत्र हजारों साल पहले भी विकसित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध था।

जिला प्रशासन इस ऐतिहासिक खोज को संरक्षित करने और इसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए गंभीर प्रयास में जुट गया है। जिला पदाधिकारी श्री नवीन (IAS) के नेतृत्व में इस क्षेत्र के संरक्षण और विकास के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।

जिलाधिकारी ने कहा कि,

“जमुई की यह ऐतिहासिक धरोहर हमारी पहचान है। इसे सुरक्षित रखने और पर्यटन व शोध केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।”

इस कठिन सर्वेक्षण अभियान का नेतृत्व वन प्रमंडल पदाधिकारी तेजस जायसवाल ने किया। टीम में फॉरेस्टर मिथिलेश कुमार, वनरक्षक दीपु रविदास और धीरेंद्र कुमार शामिल थे, जिन्होंने दुर्गम पहाड़ियों में जाकर इस महत्वपूर्ण खोज को सफल बनाया।

यह खोज न सिर्फ जमुई बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है, जो राज्य के प्राचीन इतिहास को एक नई पहचान देने का काम करेगी।

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