अप्रैल की झुलसाने वाली गर्मी ने पूरे देश में लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और लू के थपेड़े दिन को और भी चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। हालात ऐसे हैं मानो सूरज सीधे प्रहार कर रहा हो। लेकिन इसी तपिश के बीच अब राहत की उम्मीद भी नजर आने लगी है।
मौसम विभाग भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार देश के मौसम में जल्द बदलाव देखने को मिलेगा। एक सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस उत्तर भारत की ओर बढ़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में धूल भरी आंधी, तेज हवाएं, गरज-चमक और बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक 26 अप्रैल से 1 मई के बीच मौसम तेजी से करवट लेगा। यह एक ट्रांजिशन फेज होगा, जहां एक ओर हीटवेव का असर बना रहेगा, वहीं दूसरी ओर बादलों और बारिश से राहत मिलने लगेगी। हवा की दिशा बदलेगी और नमी बढ़ने से तापमान में गिरावट भी दर्ज की जा सकती है।
बिहार में बदलेगा मौसम, बारिश और ठनका का अलर्ट
बिहार में भी गर्मी अपने चरम पर है, जहां कई जिलों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। उमस ने परेशानी और बढ़ा दी है। हालांकि 25 अप्रैल के बाद मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। 27 अप्रैल से कई इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है।
मौसम विभाग ने शिवहर, मधुबनी, सुपौल और किशनगंज जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान आकाशीय बिजली (ठनका) गिरने का खतरा भी बना रहेगा, जो हर साल जान-माल को नुकसान पहुंचाता है। लोगों को सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
उत्तर भारत में आंधी-बारिश, दक्षिण में प्री-मानसून की आहट
उत्तर-पश्चिम भारत में अगले 24 से 36 घंटे अहम माने जा रहे हैं। यहां बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और कई जगहों पर धूल भरी आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
वहीं दक्षिण भारत में एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण केरल, कर्नाटक और तेलंगाना में बारिश और आंधी-तूफान की गतिविधियां बढ़ रही हैं। महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ हिस्सों में भी हल्की बारिश और ओलावृष्टि के संकेत हैं, जिसे प्री-मानसून गतिविधियों की शुरुआत माना जा रहा है।
पूर्वोत्तर में भारी बारिश का खतरा
पूर्वोत्तर भारत के राज्यों—असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में अगले 24 से 48 घंटों के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। तेज हवाएं 60 से 70 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं, साथ ही बिजली गिरने और ओलावृष्टि का खतरा भी बना रहेगा।
क्या है वेस्टर्न डिस्टर्बेंस?
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक खास मौसमी सिस्टम है, जो भूमध्य सागर क्षेत्र से बनकर पश्चिमी हवाओं के साथ भारत की ओर आता है। यह अपने साथ नमी लाता है, जिससे बारिश, आंधी और कभी-कभी ओलावृष्टि होती है। गर्मियों में यह सिस्टम लू से राहत दिलाने में अहम भूमिका निभाता है, हालांकि इसका असर आमतौर पर 2 से 4 दिन तक ही रहता है।
कुल मिलाकर, देश इस समय भीषण गर्मी और राहत के बीच के दौर से गुजर रहा है। आने वाले दिनों में जहां मौसम राहत देगा, वहीं अचानक बदलते हालात के कारण सतर्क रहना भी जरूरी होगा।

