राजधानी पटना में नशे के सौदागरों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। पटना पुलिस लगातार नशीले दवाओं के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत शुक्रवार को पुलिस ने 16 हजार 130 बोतल प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद किया।
गुप्त सूचना पर कार्रवाई
पटना में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने कई जगह छापेमारी की। इस कार्रवाई की शुरुआत चित्रगुप्त नगर थाना पुलिस को मिली एक गुप्त सूचना से हुई। पुलिस को जानकारी मिली थी कि एक टेंपो के जरिए प्रतिबंधित कफ सिरप की खेप शहर के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाई जा रही है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित जाल बिछाया और सुरेश कुमार नामक व्यक्ति को टेंपो सहित दबोच लिया। शुरुआती तलाशी में वाहन से 5 कार्टन कफ सिरप बरामद किए गए।
कोडीन युक्त कफ सिरप के साथ दो गिरफ्तार
पूर्वी क्षेत्र के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने भारी मात्रा में प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद किया है। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में ऑटो चालक सुरेश कुमार और गोदाम मालिक राकेश रंजन को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपितों ने मनजीत कुमार, नीरज कुमार, रवि समेत अन्य लोगों का नाम उजागर किया है, जो कफ सिरप के परिवहन, भंडारण और बिक्री का काम करते हैं।
16 हाजर 130 बोतल कफ सिरप जब्त
गिरफ्तार आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र के खेमनी चक स्थित एक मकान में छापेमारी की, जहां से 30 कार्टन बरामद हुए। इसके अलावा चौक थाना पुलिस ने एक गोदाम से 84 कार्टन कफ सिरप जब्त किए, जिनमें लगभग 12,000 बोतलें थीं। इस तरह कुल 119 कार्टन प्रतिबंधित कफ सिरप बरामद किया गया। पूर्वी एसपी परिचय कुमार ने बताया, कुल 16,130 बोतल कफ सिरप जब्त की गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये है। बरामद सभी दवाएं हिमाचल प्रदेश में निर्मित बताई जा रही हैं।
पूरे नेटवर्क को पता लगाने में जुटी पुलिस
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने इस काले कारोबार के कई अहम राज उगले हैं। इस नेटवर्क में मनजीत कुमार, नीरज कुमार और रवि जैसे कई अन्य सफेदपोश नाम शामिल हैं, जो भंडारण और बिक्री की कमान संभालते हैं। पुलिस अब इन फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य इस पूरे सिंडिकेट के ‘बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज’ को तोड़ना है ताकि नशे की इस सप्लाई चेन को जड़ से खत्म किया जा सके।

