पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के विवादित बयान को लेकर बवाल थमता नहीं दिख रहा है। राजनीति में आने वाली महिलाओं पर टिप्पणी मामले में पूर्णिया सांसद पर पटना के शास्त्रीनगर थाने में आवेदन दिया गया है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की प्रदेश सचिव और राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य रीना चौधरी ने पटना के शास्त्रीनगर थाना में सांसद के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
पूरे देश से माफी मांगने की मांग
बेगूसराय के तेघड़ा निवासी रीना कुमारी चौधरी ने कहा कि, ‘शीशे के घर में रहने वाले दूसरे के मकान पर पत्थर नहीं फेंकते। पप्पू यादव मानसिक रोग से ग्रसित हैं और उनका इलाज होना चाहिए। भरे मंच से उन्हें पूरे देश से माफी मांगना होगा। अगर हम महिलाएं लक्ष्मी-सरस्वती हैं तो दुर्गा और चंडी भी हैं।
FIR दर्ज कराने की मांग
रीना कुमारी ने आवेदन में लिखा कि, मैं वर्तमान सांसद पप्पू यादव के महिलाओं के विरुद्ध दिए गए बयान से आहत होते हुए उनके विरुद्ध FIR दर्ज कराना चाहती हूं। पप्पू यादव ने महिला राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाते हुए बेहद अपमानजनक, अश्लील और मानहानिकारक टिप्पणियां की। इन बयानों का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ है। पप्पू यादव ने अन्य बातों के अलावा सार्वजनिक रूप से कहा कि ‘90 प्रतिशत महिलाएं राजनेताओं के कमरे में गए बिना राजनीति में प्रवेश नहीं कर सकती हैं’।
महिलाओं की छवि धूमिल करने का आरोप
जदयू नेता रीना चौधरी ने अपनी शिकायत में कहा है कि सांसद का यह बयान न केवल अपमानजनक है, बल्कि यह उन तमाम महिलाओं का अपमान है जो कड़ी मेहनत और संघर्ष के दम पर राजनीति में अपनी पहचान बना रही हैं। उन्होंने सांसद पर सार्वजनिक रूप से महिलाओं की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया है। इस घटना से उत्पन्न भारी आक्रोश के मद्देनजर, मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि भारतीय न्याय संहिता के धारा 79, 352, 353(1), 353(2), 356 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के धारा 67 के तहत राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करते हुए इस मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच शुरू करें।
ऐसे हुई विवाद की शुरुआत
विवाद की शुरुआत पप्पू यादव के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने राजनीति में महिलाओं के प्रवेश और उनकी सफलता को लेकर अमर्यादित टिप्पणी की थी। पूर्णिया में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सांसद ने कहा था कि राजनीति में सक्रिय 90 प्रतिशत महिलाएं पुरुषों (नेताओं) के कमरों से होकर आगे बढ़ती हैं। उनके इस बयान को महिलाओं के चरित्र, आत्मसम्मान और सार्वजनिक जीवन में उनकी गरिमा पर सीधा हमला माना जा रहा है। इस पर महिलाओं में तीखी प्रतिक्रिया है और सांसद पर कानूनी कार्रवाई का दबाव बना रहीं हैं।

