झारखंड में पुलिस महकमे से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है। झारखंड हाई कोर्ट ने धनबाद से प्रशासनिक आधार पर हटाए गए 54 पुलिसकर्मियों के स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने 16 अप्रैल 2026 को डब्ल्यूपी (एस) नंबर 1781/2025 में सुनाया।
अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस फैसले के आलोक में तत्काल कार्रवाई की जाए और सभी पुलिसकर्मियों को पुनः धनबाद जिला बल में योगदान कराया जाए।
🔍 क्या था मामला?
तत्कालीन डीजीपी अनुराग गुप्ता के कार्यकाल में 24 फरवरी 2025 को 54 पुलिसकर्मियों को “प्रशासनिक दृष्टिकोण” के आधार पर धनबाद से हटा दिया गया था। इसके बाद 11 मार्च 2025 को उन्हें विभिन्न जिलों में स्थानांतरित कर दिया गया।
पुलिसकर्मियों का आरोप था कि बिना किसी ठोस आरोप या जांच के उन्हें अनुशासनहीनता का हवाला देकर हटाया गया, जो नियमों के खिलाफ है। इसी के विरोध में उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
⚖️ कोर्ट का बड़ा फैसला
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि स्थानांतरण की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद:
24 फरवरी 2025 का आदेश रद्द
सभी पुलिसकर्मियों की धनबाद वापसी का निर्देश
डीजीपी को तत्काल कार्रवाई करने का आदेश
📌 “प्रशासनिक दृष्टिकोण” पर उठे सवाल
पुलिस मैनुअल के अनुसार “प्रशासनिक दृष्टिकोण” से किया गया स्थानांतरण आमतौर पर अनुशासनात्मक माना जाता है और इसे आसानी से रद्द नहीं किया जा सकता। लेकिन इस मामले में कोर्ट ने पाया कि:
कोई स्पष्ट आरोप नहीं था
प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया
मनमाने तरीके से ट्रांसफर किया गया
🗣️ एसोसिएशन ने बताया ऐतिहासिक फैसला
झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा:
“यह जीत 54 पुलिसकर्मियों के धैर्य और न्याय में विश्वास की जीत है। नियमों को दरकिनार कर किए गए ट्रांसफर पर कोर्ट ने रोक लगाई है।”
⚠️ भविष्य के लिए बड़ी मांग
एसोसिएशन ने डीजीपी से मांग की है कि:
“प्रशासनिक दृष्टिकोण” से ट्रांसफर के लिए स्पष्ट गाइडलाइन बने
पुलिस मैनुअल का सख्ती से पालन हो
मनमाने ट्रांसफर पर रोक लगे

