आदित्य रंजन ने वार्षिक माध्यमिक परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रिंसिपलों और शिक्षकों को जमकर फटकार लगाई। जिले के 12 विद्यालयों में 10 प्रतिशत या उससे अधिक छात्र अनुत्तीर्ण होने पर उपायुक्त ने गहरी नाराजगी जताई और इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।
उपायुक्त ने परीक्षा परिणाम खराब आने पर संबंधित विद्यालयों के प्रिंसिपलों और शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा था, जिसकी समीक्षा उन्होंने बैठक के दौरान की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य कमजोर एवं वंचित बच्चों को शिक्षित कर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है, लेकिन शिक्षकों की लापरवाही बच्चों का भविष्य खराब कर रही है।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और विद्यालयों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके बावजूद यदि परीक्षा परिणाम खराब आते हैं तो यह सीधे तौर पर शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
बैठक के दौरान उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जो छात्र कमजोर हैं या परीक्षा में असफल हुए हैं, उन्हें चिन्हित कर कंपार्टमेंटल परीक्षा के लिए विशेष तैयारी कराई जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कंपार्टमेंटल परीक्षा में भी छात्र असफल होते हैं तो संबंधित शिक्षक को जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में अभिषेक झा सहित खराब प्रदर्शन करने वाले कई विद्यालयों के प्रिंसिपल और शिक्षक उपस्थित थे। इनमें मुख्यमंत्री उत्कृष्ट कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय निरसा, धनबाद प्राणजीवन अकादमी, बीएसएस बालिका उच्च विद्यालय धनबाद, उच्च विद्यालय भूली नगर समेत अन्य विद्यालय शामिल रहे।

