झाझा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां जमीन विवाद इतना बढ़ गया कि बात आत्मदाह तक पहुंच गई। वार्ड नंबर 20 स्थित बजरंग चौक के पास मंगलवार को दो पक्षों के बीच जमकर हंगामा हुआ। एक पक्ष ने गली निर्माण को अपनी जमीन पर अतिक्रमण बताते हुए विरोध किया, जबकि दूसरे पक्ष ने इसे वर्षों पुरानी सार्वजनिक गली करार दिया।
मामले में स्थानीय निवासी रंजन शर्मा ने दावा किया कि उनके घर से सटी करीब 4 फीट जमीन उनकी निजी जमीन है, जिसकी मालगुजारी टैक्स की रसीद भी उनके पास मौजूद है। उनका आरोप है कि उनकी 4 डिसमिल जमीन में से कुछ हिस्से पर अतिक्रमण कर गली बनाई जा रही है और अब उसी गली को पक्कीकरण किया जा रहा है।
रंजन शर्मा के अनुसार उन्होंने जमीन की सरकारी मापी के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया था, जिसकी तारीख 25 मई निर्धारित की गई है। उनका कहना था कि मापी होने तक निर्माण कार्य रोक दिया जाए ताकि जो भी वास्तविक स्थिति निकले, उसे दोनों पक्ष स्वीकार कर लें। लेकिन निर्माण कार्य नहीं रुका।
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले वे झाझा अंचल अधिकारी के पास गए, जहां से उन्हें थाना भेज दिया गया। थाना पहुंचने पर भी उनकी बात नहीं सुनी गई और कथित तौर पर उन्हें डांटकर यह कह दिया गया कि “यह गली है, काम नहीं रुकेगा।”
रंजन शर्मा ने बताया कि 18 मई को जब गली में ईंट-बालू गिराया जा रहा था, तब उन्होंने विरोध कर 112 नंबर पर पुलिस बुलवाई थी, जिसके बाद काम रुक गया था। लेकिन अगले ही दिन फिर से निर्माण शुरू कर दिया गया।
मामला तब और गरमा गया जब विरोध के दौरान रंजन शर्मा और उनकी पत्नी ने शरीर पर तेल डालकर आत्मदाह की कोशिश कर दी। हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें पकड़ लिया और बड़ी घटना टल गई। इस दौरान इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोगों की भारी भीड़ जुट गई।
रंजन शर्मा का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत एसपी और डीएम तक से की, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। मजबूर होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
हंगामे के बीच फिर से 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस को बुलाया गया, जिसके बाद मामले को अंचल कार्यालय भेजा गया। वहां से सरकारी अमीन को मौके पर मापी के लिए भेजा गया। देर शाम तक जमीन की मापी चलती रही। अमीन ने बताया कि मापी अभी अधूरी है और शेष कार्य बुधवार को पूरा किया जाएगा। फिलहाल निर्माण कार्य रुकवा दिया गया है।
वहीं दूसरे पक्ष ने रंजन शर्मा के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि यह गली वर्षों पुरानी है और सरकारी नक्शे में भी दर्ज है। विपक्षी पक्ष का दावा है कि संबंधित जमीन उनकी नहीं है और वे जबरन विवाद खड़ा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके पास भी सभी आवश्यक कागजात मौजूद हैं।
सुबह से शुरू हुआ यह हाईवोल्टेज मामला देर शाम तक चलता रहा। अब सबकी नजर बुधवार को होने वाली अंतिम मापी पर टिकी है। अगर जमीन रंजन शर्मा के पक्ष में निकलती है तो क्या उन्हें उनकी जमीन वापस मिलेगी? और अगर दावा गलत साबित हुआ तो आगे उनका कदम क्या होगा? फिलहाल पूरे इलाके में इसी चर्चा का माहौल है।

