मौत के मुंह से खींच लाई जिंदगी: चाईबासा में भालू के हमले से यूं भिड़ गई 22 साल की मुक्ता, कुल्हाड़ी के एक वार से भगाया

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: ‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है… पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।’ इस कहावत को झारखंड के चाईबासा की एक बेटी ने सच कर दिखाया है। जंगल में अचानक सामने आए भालू के सामने जहां अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं, वहीं 22 साल की एक युवती न सिर्फ उससे भिड़ गई, बल्कि अपनी बहादुरी से उसे भागने पर मजबूर कर दिया। यह हैरतअंगेज और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला बुरूबलजोडी (सरहसोया) जंगल का है।

​7 मिनट तक चलता रहा मौत का तांडव

​शुक्रवार की अहले सुबह 22 वर्षीय मुक्ता गागराई रोजाना की तरह घर के पास के जंगल की तरफ निकली थी। उसे अंदाजा भी नहीं था कि झाड़ियों के पीछे मौत उसका इंतजार कर रही है। अचानक एक विशालकाय भालू ने मुक्ता पर जानलेवा हमला बोल दिया। भालू ने पलक झपकते ही मुक्ता के सिर, चेहरे, कान, सीने और हाथों को अपनी खूंखार नखों से बुरी तरह नोच डाला। आमतौर पर ऐसे हमलों में लोग हिम्मत हार जाते हैं, लेकिन मुक्ता ने घुटने टेकने के बजाय लड़ने का फैसला किया। निहत्थी और लहूलुहान होने के बावजूद वह करीब 7 मिनट तक भालू से जिंदगी की जंग लड़ती रही।

​कुल्हाड़ी का वो एक वार और बच गई जान

​जब भालू लगातार मुक्ता को अपना निवाला बनाने की कोशिश कर रहा था, तब लहूलुहान मुक्ता ने अपनी बची पूरी ताकत झोंक दी। उसने पास ही रखी कुल्हाड़ी उठाई और भालू पर एक जोरदार और सटीक वार कर दिया। कुल्हाड़ी का प्रहार झेलते ही भालू की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई और वह दर्द से कराहता हुआ वापस घने जंगल की ओर दुम दबाकर भाग खड़ा हुआ। मुक्ता की चीख-पुकार सुनकर जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे, भालू भाग चुका था। मुक्ता जमीन पर लहूलुहान पड़ी थी, लेकिन उसकी आंखों में जीत की चमक थी कि उसने मौत को हरा दिया था।

​मुखिया ने दिखाई तत्परता, अस्पताल में इलाज जारी

​घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पंचायत मुखिया अनिता कोड़ा बिना एक पल गंवाए मौके पर पहुंची। उन्होंने संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हुए तुरंत अपने निजी वाहन से घायल मुक्ता को सदर अस्पताल चाईबासा पहुंचाया। डॉक्टरों के मुताबिक मुक्ता के शरीर पर गहरे जख्म हैं और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है, लेकिन उसकी जान खतरे से बाहर है।

​ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग से सुरक्षा की मांग

​इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना के बाद से बुरूबलजोडी गांव और आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से गुहार लगाई है कि जंगली जानवरों के आतंक को देखते हुए इलाके में गश्त (पेट्रोलिंग) बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में किसी और को ऐसे खतरे का सामना न करना पड़े। ​मुक्ता की इस बहादुरी की चर्चा अब पूरे इलाके में है। हर कोई इस बेटी के हौसले और जज्बे को सलाम कर रहा है, जिसने साक्षात मौत के सामने भी हार नहीं मानी।

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