17 दिनों की भूख हड़ताल पर जताई चिंता, NEET पेपर लीक का जिक्र कर परीक्षा व्यवस्था में सुधार की उठाई मांग।
तोपचांची: डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने लद्दाख के शिक्षाविद् और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई है। उन्होंने वांगचुक के नाम एक भावनात्मक पत्र लिखते हुए केंद्र सरकार से आंदोलनकारियों के साथ जल्द बातचीत शुरू करने की अपील की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर विवाद का समाधान संवाद से ही निकलता है, इसलिए सरकार को इस आंदोलन को गंभीरता से लेना चाहिए।
जयराम महतो ने कहा कि सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर हैं और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है। इसके बावजूद अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस वार्ता शुरू नहीं होना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य और देश की परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
अपने पत्र में विधायक ने लिखा कि सोनम वांगचुक ने हमेशा शिक्षा, समाज और पर्यावरण के हित में कार्य किया है। आज भी वे किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने वांगचुक के साहस, धैर्य और समर्पण की सराहना करते हुए उनकी सेहत पर चिंता जताई और कहा कि इस संघर्ष में वे पूरी मजबूती से उनके साथ खड़े हैं।
NEET पेपर लीक का किया जिक्र
जयराम महतो ने अपने पत्र में NEET-UG परीक्षा से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और अन्य अनियमितताओं ने देशभर के लाखों छात्रों का परीक्षा प्रणाली से भरोसा कमजोर किया है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2024 के NEET-UG पेपर लीक मामले में झारखंड के हजारीबाग स्थित ओएसिस स्कूल का नाम भी सामने आया था। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।
उन्होंने कहा कि लगातार पेपर लीक, परीक्षाओं के रद्द होने और दोबारा परीक्षा कराने जैसी परिस्थितियों ने छात्रों पर भारी मानसिक दबाव डाला है। कई छात्रों ने तनाव के कारण आत्महत्या जैसा कदम उठाया और अपने सुसाइड नोट में परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी निराशा भी जाहिर की।
सरकार से की जल्द पहल की अपील
पत्र के अंत में जयराम महतो ने केंद्र सरकार से छात्र हितों से जुड़े इस शांतिपूर्ण आंदोलन को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच जल्द सार्थक संवाद शुरू होना चाहिए, ताकि पूरे विवाद का पारदर्शी, न्यायसंगत और स्थायी समाधान निकल सके। उनका कहना था कि छात्रों का विश्वास बनाए रखना किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और इस दिशा में समय रहते सकारात्मक पहल जरूरी है।

