मेदिनीनगर (पलामू): पलामू जिले में बालू के अवैध कारोबार ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले में कुल 92 बालू घाट चिन्हित हैं, लेकिन अब तक एक भी घाट से वैध बालू उठाव शुरू नहीं हो सका है। इसके बावजूद औरंगा, कोयल, अमानत और सोन नदी के घाटों से दिन-रात बड़े पैमाने पर अवैध खनन जारी है।
जानकारी के अनुसार, तस्कर 100 रुपये की लागत वाला बालू 2000 से 3000 रुपये प्रति 100 सीएफटी तक बेच रहे हैं। यही अवैध बालू बिना रॉयल्टी और चालान के वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस-वे समेत कई बड़े सरकारी निर्माण कार्यों तक पहुंच रहा है। 10 जून से लागू होने वाली एनजीटी की रोक से पहले बालू माफियाओं ने भारी मात्रा में डंपिंग भी शुरू कर दी है।
92 घाट चिन्हित, लेकिन संचालन ठप
जिले में कैटेगरी-1 के 73 और कैटेगरी-2 के 19 घाट चिन्हित किए गए हैं। कैटेगरी-1 के छोटे घाटों का संचालन पंचायतों के माध्यम से होना था। पूर्व डीसी समीरा एस द्वारा 100 रुपये में 100 सीएफटी बालू बेचने की स्वीकृति भी दी गई थी, लेकिन अब तक संचालन शुरू नहीं हो पाया।
वहीं कैटेगरी-2 के बड़े घाटों के लिए चार बार टेंडर निकाले गए, लेकिन केवल पाटन के कांके खुर्द घाट का टेंडर पूरा हो सका। पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलने के कारण वहां भी लीज एग्रीमेंट लंबित है और बालू उठाव शुरू नहीं हो पाया।
अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक मिलीभगत के बिना इतने बड़े स्तर पर अवैध खनन संभव नहीं है। लोगों का कहना है कि खानापूर्ति के लिए कभी-कभार कुछ गाड़ियों को पकड़ लिया जाता है, लेकिन जुर्माना भरने के बाद वही वाहन फिर अवैध कारोबार में लग जाते हैं। कई बार छापेमारी की सूचना पहले ही संचालकों तक पहुंच जाती है।
एनजीटी रोक से पहले बढ़ी डंपिंग
स्थानीय लोगों के अनुसार, 10 जून से एनजीटी की रोक लागू होने के बाद कृत्रिम किल्लत पैदा कर बालू की कीमत 5000 रुपये प्रति 100 सीएफटी तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। इसी वजह से अभी बड़े पैमाने पर बालू डंप किया जा रहा है।
कई घाटों से खुलेआम अवैध खनन
खनन विभाग के रिकॉर्ड में जिले के किसी भी घाट को वैध लाइसेंस नहीं मिला है। इसके बावजूद सलैया, हुडमुड, फुलवरिया, पलामू किला मेला घाट, लेदवाखांड, डुबलगंज, धमधमवा, शाहपुर, कल्याणपुर, सेमरटांड, हुटार और हुसैनाबाद समेत कई घाटों से लगातार ट्रैक्टरों द्वारा बालू निकाला जा रहा है।
हुसैनाबाद क्षेत्र में सोन नदी से निकाला गया बालू सीधे वाराणसी-रांची एक्सप्रेस-वे निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने का आरोप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टर बिना रॉयल्टी बालू ढो रहे हैं।
प्रतिबंधित क्षेत्र में भी खनन
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर पुल से 500 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में भी खनन किया जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार ऐसे क्षेत्रों में घाट की नीलामी तक नहीं हो सकती।
इस पूरे मामले ने जिले में अवैध खनन, राजस्व नुकसान और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

