आसनसोल: पूर्वी रेलवे के आसनसोल रेल मंडल द्वारा शनिवार को कुल्टी के बलतोड़िया रेल साइडिंग क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। शक्तिगढ़-झाझा तीसरी रेल लाइन परियोजना के लिए आवश्यक भूमि को खाली कराने के उद्देश्य से रेलवे ने बुलडोजर चलाकर रेलवे जमीन पर बने कई कच्चे और पक्के मकानों को ध्वस्त कर दिया।
अभियान के दौरान रेलवे सुरक्षा बल (RPF), स्थानीय पुलिस और रेलवे अधिकारियों की भारी मौजूदगी रही। पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में लेकर कार्रवाई की गई, जिससे क्षेत्र में हड़कंप का माहौल बन गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, भूमि पर लंबे समय से हुए अतिक्रमण के कारण डीएफसीसी कॉरिडोर और तीसरी रेल लाइन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे थे। यूटिलिटी शिफ्टिंग, सेंटर लाइन निर्धारण और पुल निर्माण जैसे कार्यों में लगातार बाधा आ रही थी।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमणकारियों को कई बार नोटिस देकर जमीन खाली करने का अवसर दिया गया था। पिछले वर्ष भी अतिक्रमण हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन स्थानीय विरोध के कारण अभियान पूरा नहीं हो पाया था। इस बार प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए पूरे क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करा लिया, जिससे रेल परियोजना के कार्यों का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
हालांकि, इस कार्रवाई से प्रभावित परिवारों की परेशानी भी सामने आई है। वर्षों से यहां रह रहे लोगों का कहना है कि उनके परिवार कई पीढ़ियों से इस इलाके में निवास कर रहे थे। घर टूटने के बाद उनके सामने रहने, भोजन और बच्चों की पढ़ाई जैसी मूलभूत जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है।
प्रभावित लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास और सहायता की मांग की है। स्थानीय महिलाओं ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव के समय जनता के बीच पहुंचने वाले जनप्रतिनिधि आज उनकी समस्याओं से दूर हैं। वहीं रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय महत्व की रेल परियोजनाओं में बाधा बनने वाले अतिक्रमणों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
फिलहाल, रेल परियोजना को गति मिलने के साथ-साथ बेघर हुए परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा भी चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासन के सामने अब विकास और मानवीय संवेदनाओं के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

