प्रशासनिक मिसाल: जानिए कैसे IAS मनीष कुमार की ‘सबसे दूर, सबसे पहले’ मुहिम ने बदला पश्चिमी सिंहभूम का चेहरा, देश के टॉप-10 में मिली जगह

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर : झारखंड का पश्चिमी सिंहभूम जिला—जो कभी अपनी दुर्गम पहाड़ियों, घने जंगलों और सुदूर जनजातीय इलाकों के कारण विकास की दौड़ में पीछे छूट जाता था—आज देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभरा है। उपायुक्त मनीष कुमार की एक अनोखी प्रशासनिक सोच और लीडरशिप ने इस नक्सल प्रभावित और चुनौतीपूर्ण जिले को राष्ट्रीय पटल पर चमका दिया है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में पश्चिमी सिंहभूम को देश के शीर्ष 10 जिलों में चुनकर सम्मानित किया गया। खास बात यह है कि इस सूची में जगह बनाने वाला पश्चिमी सिंहभूम पूरे झारखंड का इकलौता जिला है। इस ऐतिहासिक सफलता के लिए जिले को 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी गई है।

क्या है ‘सबसे दूर, सबसे पहले’ अभियान?
​अक्सर सुदूर गांवों के लोग दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थक जाते हैं, लेकिन उपायुक्त मनीष कुमार ने इस व्यवस्था को ही उलट दिया। उन्होंने नारा दिया—‘जन भागीदारी- सबसे दूर, सबसे पहले’। इसके तहत प्रशासन खुद चलकर जनता के दरवाजे तक पहुंचा।

DC मनीष कुमार का विजन: विकास की कतार में जो व्यक्ति सबसे आखिर में और सबसे दूर खड़ा है, सरकारी योजनाओं का हक सबसे पहले उसी का है। इस अभियान के तहत जिला प्रशासन ने जो रफ्तार पकड़ी, उसके आंकड़े किसी भी प्रशासनिक टीम को प्रेरित कर सकते हैं।

गांवों तक पहुंच: जिले के 18 प्रखंडों के 927 गांवों को कवर किया गया।
मेगा कैंप: रिकॉर्ड 855 विशेष शिविर लगाए गए।
बड़ा फायदा: 2.23 लाख से अधिक ग्रामीणों को सीधे तौर पर लाभ मिला।
ऑन-स्पॉट सर्विस: स्वास्थ्य, शिक्षा, पेंशन और कृषि से जुड़ी 21,845 से अधिक सेवाएं तुरंत दी गई।

सिर्फ कागजी काम नहीं, जमीन पर उतरीं ये बुनियादी सुविधाएं
​मनीष कुमार के मार्गदर्शन में लगे इन कैंपों में ग्रामीणों को वे अधिकार मिले, जिनके लिए उन्हें मीलों का सफर तय करना पड़ता था।
दस्तावेज और पहचान: आधार कार्ड, जाति-आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और आयुष्मान भारत कार्ड मौके पर ही बनाए गए।
आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा: वृद्धावस्था/विधवा पेंशन, किसान क्रेडिट कार्ड और मनरेगा के तहत तुरंत रोजगार से जोड़ा गया।
हेल्थकेयर क्रांति: हजारों लोगों की स्वास्थ्य जांच हुई, सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग की गई और रिकॉर्ड 680 यूनिट से अधिक स्वैच्छिक रक्तदान हुआ। टीबी मरीजों को गोद लेने की मुहिम भी चलाई गई।

​’तिथि भोज’ और ‘सखी दिवस’ जैसे इनोवेटिव आइडियाज
​इस अभियान की सफलता सिर्फ सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें सामाजिक बदलाव के प्रयोग भी शामिल थे।
सखी दिवस: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष आयोजन किए गए।
तिथि भोज-सह-जन्मोत्सव: सरकारी स्कूलों में सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और सामाजिक भेदभाव को मिटाने के लिए यह अनूठी पहल शुरू की गई, जिसने खूब सुर्खियां बटोरीं।

यह सम्मान पश्चिमी सिंहभूम की जनता का है
​इस गौरवशाली उपलब्धि पर उपायुक्त मनीष कुमार ने अपनी टीम और जनता की पीठ थपथपाई है। उन्होंने कहा यह सम्मान पूरे जिले की जनता, हमारी प्रशासनिक टीम और फील्ड में डटे सभी विभागों के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है। हमारा सफर यहीं नहीं थमेगा। जिला प्रशासन आगे भी इसी प्रतिबद्धता के साथ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक अधिकार पहुंचाने के लिए काम करता रहेगा।

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