डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। अस्पताल के सबसे संवेदनशील विभाग यानी इंटेंसिव केयर यूनिट से एक-दो नहीं, बल्कि 15 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर अपनी ड्यूटी से गायब पाए गए।
इस गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए अस्पताल अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने सभी आरोपी डॉक्टरों को कारण बताओ (शोकाज) नोटिस जारी कर दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अगर 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इन पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
औचक निरीक्षण में खुली पोल: दूसरी और तीसरी शिफ्ट से नदारद थे डॉक्टर्स
अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार यह पूरी कार्रवाई एक औचक निरीक्षण के बाद हुई है। इन सभी 15 जूनियर रेजिडेंट (नॉन-एकेडमिक) डॉक्टरों की तैनाती ICU में दूसरी और तीसरी शिफ्ट में की गई थी। लेकिन जब जांच टीम पहुंची, तो ड्यूटी स्थल पर डॉक्टर गायब मिले। अस्पताल अधीक्षक डॉ. बलराम झा ने कहा कि ICU अस्पताल का वो हिस्सा है जहां जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे गंभीर मरीज भर्ती होते हैं। ऐसे में डॉक्टरों का गायब रहना मरीजों को उनके हाल पर छोड़ देने जैसा है। इस लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इन डॉक्टरों से मांगा गया जवाब
अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही बरतने वाले जिन डॉक्टरों को नोटिस जारी किया है, उनमें डॉ. सुमित कुमार, डॉ. गोपाल सिंह, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. स्नेहल सुमन, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. प्रियंका कुमारी, डॉ. अली अहलाब, डॉ. अर्पण सौरभ टोपनो, डॉ. रजनीश, डॉ. शशि रंजन, डॉ. अरविंद कुमार रवि, डॉ. अमित कुमार, डॉ. आकाश और डॉ. रितु रानी हांसदा शामिल हैं। प्रशासन ने इन सभी से पूछा है कि इस घोर लापरवाही के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए?
HoD की टिप्पणी के साथ 24 घंटे की डेडलाइन
अस्पताल अधीक्षक कार्यालय ने अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा है कि सभी संबंधित डॉक्टरों को नोटिस मिलने के 24 घंटे के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण सौंपना होगा। खास बात यह है कि यह जवाब सीधा स्वीकार नहीं होगा। डॉक्टरों को अपने विभागाध्यक्ष की टिप्पणी के साथ इसे अधीक्षक कार्यालय में जमा करना होगा। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्र की एक प्रति एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और सभी विभागाध्यक्षों को भी भेज दी गई है ताकि भविष्य में कोई भी डॉक्टर मरीजों की जान दांव पर लगाने की जुर्रत न कर सके।

