बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया गुरुवार को औपचारिक रूप से पूरी हो गई। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि तक किसी भी उम्मीदवार ने अपना पर्चा वापस नहीं लिया। इसके बाद निर्वाची पदाधिकारी ने पवन सिंह समेत सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया।
वोटिंग की नौबत नहीं आई
बिहार विधान परिषद की 10 खाली सीटों पर चुनाव होने थे। आज नामांकन वापसी का अंतिम दिन था। सीटों के अनुपात में ही उम्मीदवार उतारे गए थे इसलिए निर्विरोध निर्वाचन हुआ और वोटिंग की नौबत नहीं आई। इसके साथ ही बीजेपी से पवन सिंह, संजय मयूख, शीला पंडित और अनिल ठाकुर, जेडीयू से भारती मेहता, निशांत कुमार, ललन प्रसाद, शिवानी देवी, लोजपा (रामविलास) से अशरफ अंसारी और आरजेडी से सुनील सिंह निर्विरोध चुने गए।
10 सीटों के लिए 10 उम्मीदवारों ने भरा था पर्चा
जानकारी हो कि 10 सीटों पर ही चुनाव होना था। इसके लिए 10 उम्मीदवार मैदान में थे। जेडीयू और बीजेपी से चार-चार, लोजपा से एक और आरजेडी ने एक उम्मीदवार को उतारा था। सोमवार को सभी 10 प्रत्याशियों का नामांकन वैध पाया गया था। मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच हुई जिसमें सबके पर्चे सही पाए गए थे। अब नतीजों में सभी 10 उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत हो गई है।
उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मिली निराशा
इस बीच एनडीए घटक दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेन्द्र कुशवाहा को भारी निराशा का सामना करना पड़ा। उनके बेटे दीपक प्रकाश पंचायती राज मंत्री हैं। उन्हें भी निशांत कुमार की तरह 6 महीने के भीतर किसी भी एक सदन का सदस्य बनना था। लेकिन इस बार एनडीए ने उन्हें विधान परिषद के लिए मौका नहीं दिया। ऐसे में अब उनको अपना मंत्री पद बचाने के लिए विधानसभा के उपचुनाव (अगर उनकी मां स्नेहलता कुशवाहा अपनी सीट खाली करती हैं तो) में ही जाना एकमात्र विकल्प है।

