मानसून में बालू उठाने पर 15 अक्टूबर तक पूरी तरह रोक, उपायुक्त ने कहा- ‘अवैध खनन पर होगी जेल’

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : झारखंड में मानसून की शुरुआत के साथ ही बालू के अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रशासन ने पूरी तरह से शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के आलोक में जिले के सभी बालू घाटों से 10 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक बालू का उठाव पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। उपायुक्त राजीव रंजन ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिया है कि इस अवधि में अगर कहीं भी अवैध बालू उत्खनन हुआ, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। ​समाहरणालय सभागार में आयोजित जिला स्तरीय खनन टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने अवैध खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए। इस उच्च स्तरीय बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक पीयूष पाण्डेय, डीएफओ सबा आलम अंसारी और एडीएम लॉ एंड ऑर्डर सहित कई बड़े अधिकारी मौजूद रहे।

सिर्फ 25 दिनों में 900 टन से ज्यादा अवैध खनिज जब्त
​बैठक में पिछले एक महीने की कार्रवाई का ब्योरा सामने रखा गया, जो यह दिखाता है कि प्रशासन अवैध खनन माफियाओं के खिलाफ लगातार एक्शन मोड में है। 18 मई से 14 जून 2026 के बीच 906 टन अवैध खनिज जब्त किया गया।
​सबसे ज्यादा 812 टन बालू जब्त किया गया। 74 टन चिप्स और 20 टन लौह अयस्क बरामद किया गया। माफियाओं से 4.13 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। इस दौरान 2 एफआईआर भी दर्ज की गई हैं।

हाइवा और ट्रैक्टरों पर चला प्रशासन का हंटर
​सड़क पर अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग करने वालों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई की गई है। टास्क फोर्स ने इस अभियान के दौरान कुल 24 वाहनों को सीज किया है, जिनमें 16 हाइवा, 5 ट्रैक्टर, 3 अन्य मालवाहक वाहन (407 श्रेणी) शामिल है।

उपायुक्त का सख्त निर्देश
सभी संबंधित विभाग आपस में तालमेल बिठाकर नियमित जांच अभियान चलाएं। बालू घाटों, खनन प्रभावित इलाकों और मुख्य सड़कों पर विशेष नजर रखी जाए। ओवरलोडिंग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी, शिकायत मिलते ही तुरंत एक्शन लें।

प्रदूषण फैलाने वाले क्रशर और ईंट-भट्टों पर भी नजर
​बैठक में केवल खनन ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले उद्योगों की भी समीक्षा की गई। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (आदित्यपुर क्षेत्रीय कार्यालय) की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में 2 क्रशर और 2 ईंट भट्टों का औचक निरीक्षण किया गया है। उपायुक्त ने साफ किया कि पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी करने वाले किसी भी उद्योग को बख्शा नहीं जाएगा और अनियमितता पाए जाने पर उनके खिलाफ सीलिंग और बंदी की कार्रवाई की जा सकती है।

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